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कांग्रेस ने अमेरिका-मध्यस्थ संघर्षविराम पर उठाए सवाल, सरकार से पारदर्शिता और संसद सत्र की मांग

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच घोषित किए गए संघर्षविराम को लेकर कांग्रेस ने गहरी चिंता व्यक्त की है और सरकार से विशेष संसद सत्र बुलाकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर सवाल उठाए।

पायलट ने कहा, “यह आज़ादी के 75 वर्षों में पहली बार है जब किसी तीसरे देश ने हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सोशल मीडिया पर संघर्षविराम की घोषणा और उसका भारत द्वारा स्वीकार करना हैरान करने वाला है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्ट किया कि “क्या सरकार पहले से इस अमेरिकी पहल से अवगत थी?” यदि हाँ, तो यह जानकारी देश और संसद से क्यों छिपाई गई?

सभी दलों की बैठक और प्रधानमंत्री की उपस्थिति की मांग
पायलट ने केंद्र सरकार से सभी राजनीतिक दलों के साथ एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की और कहा कि इस बैठक में प्रधानमंत्री को स्वयं उपस्थित होना चाहिए। “देश की 140 करोड़ जनता और सभी राजनीतिक दल सरकार के साथ खड़े थे। अब प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि संघर्षविराम पर सरकार की स्थिति क्या है?”

पीओके पर अमेरिका की दखल को बताया अस्वीकार्य
पायलट ने 1994 के संसद प्रस्ताव की याद दिलाई जिसमें पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत का अभिन्न अंग घोषित किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात में उस प्रस्ताव को लागू करने का सुनहरा मौका है, लेकिन अमेरिका और कुछ अन्य देश इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अस्वीकार्य है।

संघर्षविराम के बावजूद पाकिस्तान की गोलीबारी जारी
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि संघर्षविराम की घोषणा के बावजूद पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी रात भर जारी रही। उन्होंने सवाल किया, “क्या पाकिस्तान पर भरोसा किया जा सकता है? क्या ऐसी किसी गारंटी का सरकार के पास सबूत है?”

इतिहास की सीख और नेतृत्व की मिसालें
पायलट ने 1971 के युद्ध और अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी उसी तरह के स्पष्ट नेतृत्व और साहस की जरूरत है। “इंदिरा गांधी ने तब अमेरिका के 7वें बेड़े की धमकी के बावजूद झुकने से इनकार कर दिया था। आज भी वही दृढ़ता चाहिए,” उन्होंने कहा।

अंत में उन्होंने भारतीय सेना की प्रशंसा करते हुए कहा, “हमारी सेना ने एक बार फिर देश की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता और ताकत साबित की है। लेकिन राजनीतिक नेतृत्व को भी उतनी ही स्पष्टता और निष्ठा दिखानी चाहिए।”

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