मुंबई: संगीत की दुनिया में कई सितारों की शुरुआत बड़े मंच से होती है, लेकिन अनुराधा पौडवाल की गायकी से जुड़ी यह कहानी बेहद दिलचस्प है। बताया जाता है कि साल 1973 में एक साधारण घरेलू रिकॉर्डिंग ने उनकी आवाज को फिल्मी संगीत की दुनिया तक पहुंचा दिया था।
🔹 ‘अभिमान’ के लिए चाहिए थी शिव स्तुति
साल 1973 में संगीतकार एस. डी. बर्मन फिल्म ‘अभिमान’ के संगीत पर काम कर रहे थे। फिल्म में एक अहम दृश्य था, जिसमें अमिताभ बच्चन का किरदार पहली बार जया भादुड़ी को शिव मंदिर में भक्ति में लीन होकर गाते हुए सुनता है।
इस दृश्य के लिए एक भावपूर्ण संस्कृत शिव स्तुति की जरूरत थी। बताया जाता है कि बर्मन दा ने अपने संगीत सहायक अरुण पौडवाल से उपयुक्त श्लोक तैयार करवाने और उसकी धुन बनाने को कहा।
🔹 रसोई में रोटियां बेल रही थीं अनुराधा
धुन तैयार करने के बाद अरुण पौडवाल घर पहुंचे। उस समय उनकी पत्नी अनुराधा पौडवाल रसोई में परिवार के लिए रोटियां बना रही थीं।
अरुण ने उनसे श्लोक गाकर रिकॉर्ड करने को कहा, ताकि बर्मन दा और लता मंगेशकर को धुन समझाई जा सके। अनुराधा ने बिना किसी विशेष तैयारी के वहीं ‘ॐकारं बिंदु संयुक्तं’ गाकर उसकी रिकॉर्डिंग कर दी।
🔹 रिकॉर्डिंग सुनते ही बर्मन दा ने पूछा—किसकी आवाज है?
अगले दिन अरुण पौडवाल वह रिकॉर्डिंग लेकर बर्मन दा के पास पहुंचे। जैसे ही उन्होंने अनुराधा की आवाज सुनी, उनकी सादगी और भावपूर्ण गायन ने उनका ध्यान खींच लिया।
कहानी के अनुसार, बर्मन दा ने तुरंत पूछा कि यह आवाज किसकी है। जब उन्हें बताया गया कि इसे अरुण की पत्नी अनुराधा ने गाया है, तो उन्होंने उनकी आवाज को फिल्म के दृश्य के लिए उपयुक्त माना।
🔹 लता मंगेशकर की जगह अनुराधा की आवाज
बताया जाता है कि शुरुआत में इस स्तुति को लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड कराने की योजना थी। लेकिन अनुराधा की रिकॉर्डिंग सुनने के बाद बर्मन दा को लगा कि इस छोटे से श्लोक में उनकी सहज और आध्यात्मिक आवाज ज्यादा प्रभावी रहेगी।
इस तरह घर में तैयार हुई एक साधारण रिकॉर्डिंग फिल्म ‘अभिमान’ के संगीत का हिस्सा बनने तक पहुंच गई।
🔹 इसके बाद खुलते चले गए बॉलीवुड के दरवाजे
‘अभिमान’ से जुड़ी इस घटना के बाद अनुराधा पौडवाल के लिए फिल्म संगीत की दुनिया में काम के रास्ते खुलने लगे। बताया जाता है कि इसके बाद जयदेव, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और कल्याणजी-आनंदजी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ भी उन्हें काम करने के अवसर मिले।
🔹 एक घरेलू रिकॉर्डिंग से शुरू हुआ यादगार सफर
अनुराधा पौडवाल की इस कहानी का सबसे खास पहलू यही है कि जिस आवाज ने आगे चलकर भारतीय संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाई, उसकी चर्चा एक बड़े स्टूडियो से नहीं, बल्कि घर की रसोई से शुरू हुई बताई जाती है।
रोटियां बेलते हुए की गई एक अनौपचारिक रिकॉर्डिंग से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर अनुराधा पौडवाल को हिंदी फिल्म और भक्ति संगीत की दुनिया की चर्चित आवाजों में शामिल करने वाला साबित हुआ।

