Thursday 30th of April 2026 04:25:46 AM
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कोविड कंट्रोल के लिए रात 9 बजे तक सम्पन्न कराएं सभी आयोजन

 

गोरखपुर । यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिलों में कोविड केस की संख्या का आकलन कर नाइट कर्फ्यू का निर्णय डीएम अपने स्तर से लें, लेकिन यह स्थिति आने से पहले जिला प्रशासन ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे कोई भी सार्वजनिक आयोजन, विवाह समारोह या अन्य कार्यक्रम रात 9 बजे तक सम्पन्न कर लिए जाएं। मुख्यमंत्री योगी शनिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में कोरोना नियंत्रण, कोविड टीकाकरण और इंसेफेलाइटिस उन्मूलन के संबंध में मंडलीय समीक्षा बैठक ने की। उन्होंने कहा कि कोरोना का यह दूसरा फेज भी पहले चरण की भांति भले ही चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सामूहिक प्रयासों से इस पर काबू पाने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। कोरोना जांच और टीकाकरण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जांच और टीकाकरण में किसी को भी दिक्कत न आए। कोविड मरीजों के इलाज के लिए डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों में बेड की संख्या में कोई कमी नहीं आनी चाहिए और भर्ती मरीजों को सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए। कहा कि कोविड कंट्रोल के लिए रात 9 बजे तक सभी आयोजनों को सम्पन्न कराया जाना चाहिए।

 

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जारी दिशा निर्देशों का हर हाल में अनुपालन कराएं। कहा कि इसके लिए लोगों को जागरूक किया जाए और उन्हें शासन की ओर से निर्धारित मानकों का अनुपालन करने को प्रेरित किया जाए।

 

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कोरोना से बचाव के कार्यक्रमों में किसी भी स्तर पर लापरवाही अक्षम्य होगी। सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ न होने देना, सामाजिक दूरी का अनुपालन और मास्क के प्रयोग की अनिवार्यता पर लगातार नजर रखी जाए। इसके लिए सद्भावनापूर्वक प्रवर्तन की कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना से बचाव के लिए स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने की हिदायत दी। योगी ने कहा सभी जिलों के डीएम और सीएमओ कोरोना के संबंध में नियमित समीक्षा करें, जांच और टीकाकरण पर फोकस करते हुए कोरोना का फैलाव रोकने की दिशा में ठोस कार्यवाही करें।

 

योगी ने इंसेफेलाइटिस उन्मूलन के प्रयासों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ²ढ़ इच्छाशक्ति से किए गए समन्वित प्रयासों से इंसेफेलाइटिस अब खात्मे के कगार पर है। फिर भी इससे बचाव और इलाज में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बचाव और इलाज के मुकम्मल इंतजाम पर ध्यान रखें। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान जारी रहे।

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