
उज्ज्वल दुनिया
रांची। झारखंड विधानसभा में मुस्लिम विधायकों और अन्य स्टाफ के लिए अलग से नमाज कक्ष का आवंटन किया गया है। विधानसभा के उप-सचिव नवीन कुमार के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में लिखा है कि विधानसभा के अंदर कमरा नंबर टी डब्ल्यू 348 नमाज पढ़ने के लिए आवंटित किया जाता है। नमाज पढ़ने के लिए विशेष कमरा आवंटित करने के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है। संवैधानिक संस्थान में धार्मिक कार्यों के लिए जगह आवंटित करने पर विभिन्न राजनीतिक दलों की अपने अपने तर्क है। भाजपा इस मुद्दे को लेकर हमलावर है तो मौजूदा हेमंत सरकार में सहयोगी दल बचाव की मुद्रा में आ गई है।
संसदीय कार्य मंत्री को नही है जानकारी
पूरे प्रकरण पर संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम अपना पल्ला झाड़ते नजर आए। उज्जवल दुनिया के संवाददाता ने जब शनिवार दोपहर 3:38 पर उनसे टेलिफोनिक बात कर उनका पक्ष जानना चाहा तो मंत्री आलमगीर आलम ने इस मामले पर अपनी अनभिज्ञता जताया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है पूरी जानकारी होने के बाद वे अपना पक्ष रखेंगे। उनसे जब कहा गया है कि बजाता है विधानसभा की ओर से आदेश निकाला गया है तो श्री आलम ने कहा कि हम अभी तक वह नोटिस नहीं पढ़े हैं।
भाजपा ने सीएम हाऊस के अंदर मंदिर कैसे बनवाया?
कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि यह मुद्दा विधानसभा का है इसलिए इस पर कुछ कहना जायज नहीं है। उन्होंने कहा कि लेकिन इस विषय पर हंगामा करने वाले भाजपा नेताओं से पूछना चाहते हैं कि जब उनकी सरकार में मुख्यमंत्री आवास में मंदिर बनाया गया था तब वह लोग कहां थे जो आज हंगामा खड़ा कर रहे हैं।
इतना हंगामा उचित नहीं- विनोद सिंह
माले विधायक विनोद सिंह ने कहा कि नमाज अदा करने के लिए अगर कोई कक्ष आवंटित किया गया है तो इस में दिक्कत क्या है। यह परंपरा चलती आ रही है कि अगर कोई कर्मचारी या जनप्रतिनिधि अपने धर्म का अनुसरण पालन करते हैं तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या एक संवैधानिक संस्था में किसी धर्म विशेष के लिए जगह आवंटित करना उचित है तो उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
संवैधानिक संस्थाओं के अंदर जाति-धर्म के आधार पर आवंटन गलत परंपरा- भाकपा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के अजय कुमार सिंह ने कहा कि विधानसभा संवैधानिक स्थान है। किसी विशेष जाति धर्म संप्रदाय विशेष के लिए जगह आवंटित करना दुखद है। इससे लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंची है। जिनके द्वारा भी यह कार्य किया गया है उस पर कानून सम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। संविधान की गरिमा को बचाने के लिए इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करना चाहिए। इससे आपसी सौहार्द और संविधान की मूल भावना बची रहेगी।

