राजद में क्या है तेज प्रताप और मीसा का भविष्य ?

राजद के अंदर क्या है मीसा और तेज प्रताप का भविष्य?
राजद के अंदर क्या है मीसा और तेज प्रताप का भविष्य?

लालू प्रसाद यादव की तीन संतानें सक्रिय राजनीति में हैं। बेटी मीसा भारती और दोनों बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी यादव । आज की बात करें तो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप और सबसे बड़ी बेटी मीसा, के लिए लालू की राजनीतिक विरासत संभालने की बात लगभग खत्म सी हो गई है। राजद के वोटर्स और संगठन से जुड़े नेताओं ने तेजस्वी यादव का नेतृत्व लगभग स्वीकार कर लिया है ।

अब मीसा भारती और तेज प्रताप यादव के पास क्या हैं विकल्प ?

कुल मिलाकर कहें तो तेज प्रताप यादव और मीसा भारती के पास सबसे आसान विकल्प तो यही है कि चुपचाप तेजस्वी का नेतृत्व स्वीकार कर लें। जबतक लालू प्रसाद यादव और राबडी देवी जिंदा हैं, दोनों को कहीं ना कहीं से टिकट मिलता रहेगा। लालू यादव के देहांत के बाद या तेजस्वी यादव की पत्नी के आने के बाद टिकट भी तेजस्वी परिवार की दया पर ही मिलेगी। तेजस्वी अपने हस्तिनापुर के निष्कंटक राज में बड़े भाई या बड़ी बहन को हिस्सेदार बनाना चाहेंगे या नहीं,  कुछ कहा नहीं जा सकता।

दूसरा विकल्प क्या है? 

तेज प्रताप यादव या मीसा भारती के पास दूसरा विकल्प है कि मजबूत पार्टी या संगठन खड़ा कर लालू की विरासत पर दावा ठोक दें। जैसे महाराष्ट्र में राज ठाकरे ने किया था या तत्कालीन आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू या जगन मोहन रेड्डी ने किया।

तीसरा विकल्प जिसपर तेज प्रताप यादव कर रहे विचार

तेज प्रताप यादव के अबतक के हाव भव से तो यही लग रहा है कि वे राजद के इतर किसी मजबूत पार्टी या संगठन की तलाश कर रहे हैं। कांग्रेस से उनकी बात बनते-बनते रह गई।  क्योंकि कांग्रेस को पता है कि इस वक्त बिहार में तेजस्वी को नाराज करने के नुकसान ज्यादा और फायदा कम है ।

कांग्रेस से बात न बनता देख तेज प्रताप यादव ने जेडीयू और पशुपति कुमार पारस वाले राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी  से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की। जेडीयू में तेज प्रताप यादव की इंट्री थोड़ी मुश्किल है क्योंकि उनके बड़बोले बयानों से पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा हो सकती है।

मीसा भारती अब क्या करेंगी ?

लालू प्रसाद यादव के घर मचे राजनीतिक घमासान में अबतक मीसा भारती ने अपने कार्ड बड़े सोंच समझकर फेंके हैं। वे तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव के प्रति वफादारी की कसमे खाते हुए राजद के अंदर ही अपनी जगह तलाश रही हैं। उनको पता है कि जबतक मम्मी-पापा हैं, तबतक राजनीति की गाड़ी चलती रहेगी। बीच-बीच में वे तेज प्रताप यादव को भी दुलार देती हैं कि भईया हम दोनों अन्याय के शिकार हुए हैं। लेकिन स्टार प्रचारकों की लिस्ट में अपना नाम न देखकर दुःख तो हुआ ही होगा

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