पत्थर खदान लीज मामले पर बोले हेमंत सोरेन, हर आरोप का माकूल जवाब मिलेगा

नई दिल्ली में मुख्यमंत्रियों एवं न्यायाधीशों के सम्मेलन में सीएम हेमंत सोरेन
नई दिल्ली में मुख्यमंत्रियों एवं न्यायाधीशों के सम्मेलन में सीएम हेमंत सोरेन

नई दिल्ली । राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं।  मैं आरोपो से नही घबराता । समय आने पर हर आरोप का मुकम्मल जवाब दिया जाएगा । ये बातें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमन्त्री हेमंत सोरेन ने कही ।

केंद्र झारखंड के हिस्से का एक लाख 30 हजार रुपए वापस करे

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नयी दिल्ली में कहा है कि केंद्र सरकार राज्य का एक लाख 30 हजार करोड़ रुपये की बकाये का भुगतान जल्द से जल्द करे. नयी दिल्ली में राज्यों के मुख्यमंत्रियों और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन में शिरकत करने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि झारखंड में कई कल्याणकारी काम तेजी से चल रहे हैं. यह विपक्ष को नहीं दिख रहा है. उन्होंने कहा कि समय आने पर विपक्षी पार्टियों को सरकार की ओर से करारा जवाब दिया जायेगा.

विपक्ष के पास आरोप लगाने के अलावा कोई काम नही 

उन्होंने कहा कि राज्य भर में यूनिवर्सल पेंशन योजना चल रही है. पेंशनधारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो दिख नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि राजनीति में आरोप प्रत्यारोप लगता रहा है. विपक्ष के पास कोई काम नहीं है. यदि केंद्र सरकार से बकाया झारखंड को मिल जायेगा, तो हम 50 रुपये प्रति यूनिट भी बिजली खरीद कर बिजली संकट दूर कर सकते हैं. 24 घंटे झारखंड वासियों को बिजली मिल सकती है.

झारखंड में न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान भवन में आयोजित सम्मेलन एक सही प्रयास है. इस तरह के सम्मेलनों से कानून-व्यवस्था में उत्तरोत्तर विकास संभव होगा. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में भाग लेने से इस बात का पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया में स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने की बातें कहीं. स्थानीय और प्रांतीय भाषाओं को बढ़ावा दिये जाने से स्थानीय समुदाय को सुलभ न्याय मिल पायेगा और न्याय प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा.

उन्होंने कहा कि मैंने सम्मेलन में राज्य सरकार की तमाम कोशिशों की जानकारी दी, जिससे न्यायिक प्रणाली और न्यायिक संस्थानों को और प्रभावकारी बनाया जा सके. राज्य सरकार की तरफ से व्यवहार न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तथा अन्य न्यायिक आधारभूत संरचना को भी विकसित करने की कोशिशें की जा रही है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र  में न्यायिक प्रक्रिया एक स्तंभ है. हमलोग स्वतंत्र रूप से इसे बढ़ाने को लेकर कृतसंकल्प हैं.

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