झारखंड में पक्ष विपक्ष की नोक झोंक जारी, मौके का फायदा उठाने में लीन बीजेपी

रांची: राजमहल पहाड़ी श्रृंखलाओं के लगातार दोहन से संथाल का ही नहीं संपूर्ण झारखंड का इनदिनों तापमान बढ़ा हुआ. प्रदेश में सत्ता की रस्साकशी इतनी बढ़ गई है कि ऐसा प्रतीत होने लगा है कि राज्य के सियासी पंडित रंग बदलने का अनुमान लगाने लगे है. यूं तो विधानसभा के बजट सत्र के बाद से ही झारखंड की सियासत में उथल पुथल मच गई थी लेकिन अब एक साथ कई संवैधानिक संस्थाओं ने सत्ता में बैठे लोगों को घेरना शुरू कर दिया है.

शुरुआत करते सीएम सह बरहेट विधायक हेमंत सोरेन से. सीएम हेमंत सोरेन पत्थर खदान लीज मामले में दोहरे सरकारी लाभ लेने और जन प्रतिनिधित्व‍ कानून का उल्लंघन करने के मामले में चौतरफा घिरते नजर आ रहे हैं. सीएम हेमंत पर अगर दोष साबित हुआ तो उन्हें सीएम पद से ही नहीं विधायक के पद से भी हाथ धोना पड़ सकता. ऐसे में झारखंड सरकार पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे है. वहीं तमाम संवैधानिक संस्थाएं राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत पर लग रहे गंभीर आरोपों को लेकर रेस हो गईं है. अब सीएम हेमंत के सामने खदान चलाने के संगीन आरोपों की सफाई में एक साथ राज्यपाल, झारखंड हाई कोर्ट और चुनाव आयोग का सामना एक बड़ी चुनौती है. केंद्र और गृह मंत्रालय के पास पूरे मामले के संज्ञान में आते ही गिद्ध दृष्टि जमाए हुए है. सीएम हेमंत के अलावा दुमका विधायक और सीएम के अनुज बसंत सोरेन पर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने संगीन आरोप लगाते हुए माइनिंग कंपनी में पार्टनर बन खनन करवाने लगा है. दोनों भाइयों पर सरकार से दोहरा लाभ लेने का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए विधानसभा सदस्यता खत्म करने की मांग की है.

इस संबंध में रघुवर दास ने बताया कि किसी राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा खदान लीज का कार्य गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी मंत्रियों के लिए आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन है. यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (1) (डी) के तहत आपराधिक कृत्य है. इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए तुरंत पद से बर्खास्त कर देना चाहिए.

बस इतना ही नहीं, दो दिन पूर्व माननीय राज्यपाल ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को तलब कर उक्त मामले की जानकारी प्राप्त किया. वहीं मुख्य सचिव ने भी राज्यपाल को जानकारी दी कि जिस पत्थर खदान लीज की चर्चा है उसे सरेंडर कर दिया गया है. इतना ही नहीं हाई कोर्ट ने भी मुख्यमंत्री के खिलाफ याचिका दायर की है और हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है.

ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम पर भी ईडी का शिकंजा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पत्थर खदान लीज मामले पर चौतरफा जवाब तलब का दौर चल ही रहा है वहीं प्रदेश सरकार के सहयोगी दल के कांग्रेस के कद्दावर नेता और हेमंत सरकार में नंबर दो के मंत्री आलमगीर आलम पर ईडी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. आलमगीर पर बरहड़वा के एक मामले पर मनी लोंड्रिंग के तहत ईडी जांच कर रही है.

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर सरयू राय का आरोप

निर्दलीय विधायक सरयू राय के आरोप से स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता तिलमिला गए है. सरयू राय ने बीते दिनों बन्ना गुप्ता के खिलाफ बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि मंत्री ने खुद और अपने अधीनस्थ 59 पदाधिकारी और कर्मचारियों को कोरोना प्रोत्साहन राशि के नाम पर एक महीने का अतिरिक्त वेतन देने का आदेश पारित कर दिया है. उन्होंए इस कृत्य को प्रावधानों के विरुद्ध बताया है और सरकारी पैसे में गड़बड़झाला प्रतीत होने की आशंका जताई है. इस मामले में सरयू ने सीएम हेमंत से मंत्री बन्ना गुप्ता को बर्खास्त करने और भ्रष्टाचार के मामले की एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है।

सियासी गलियारे में चर्चा क्या बदल जाऐगी झारखंड की फिजा

वैसे तो सियासी गलियारे में यूपी चुनाव के पूर्व से ही यह चर्चा थी कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद झारखंड में भाजपा का खेल शुरू होगा. यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को एकसूत्र में पिरोए रखने का पूरा प्रयास कर रही थी. कांग्रेस के नए प्रभारी भी लगातार नजर बनाए हुए है. फलतः प्रदेश प्रभारी नियुक्त होते ही झारखंड का लगातार दौरे पर है. सत्ता में शामिल गठबंधन दलों में भी शीतयुद्ध जैसी स्थिति है. झामुमो में भी मुख्यमंत्री के बयान से इतर उनके कबीनेट मंत्री और विधायकों का बयान आ रहे है. खतियान आधारित स्थानीय और नियोजन नीति पर भी झामुमो विधायक का भी एकमत नजर नहीं है. फलतः अपने ही लोगो से भी सरकार की मुश्किलें बढ़ी हुई है. मौके का फायदा उठाने में माहिर बीजेपी यूपी चुनाव के दरम्यान ही दिल्ली मे भाजपा आलाकमान के तलब पर झारखंड के भाजपा सासंद समेत पूर्व सीएम रघुवर दास और अन्य के साथ झारखंड की सत्ता की चाभी हासिल करने की रणनीति बनाई गई. बहरहाल झारखंड में पल-पल रंग बदलती सियासत का अलग रंग कौन सा होगा, यह तो वक्त ही बताएगा. लेकिन वेट एंड वाच के भरोसे बैठी राजनीतिक पार्टियां आमने-सामने लड़ाई के मूड में हैं.

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