कोयले की कमी से बिजली की समस्या आशंकित, आधे से ज्यादा पावर प्लांट के पास महज 7 से 10 दिन का कोयला शेष

नई दिल्ली: झारखंड को बिजली कटौती की समस्या से उभारने के लिए भले राज्य सरकार ने 1690 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है, लेकिन इससे अभी समस्या समाप्त नहीं हुई है. विभिन्न थर्मल पावर प्लांट में कोयले की घटी स्टॉक के कारण देश में बिजली की समस्या होने की आशंका जताई जा रही है. बिजली की बढ़ी खपत के बीच चार राज्यों में फिलहाल आठ का दस दिन का कोयला ही मौजूद है जबकि अन्य आठ राज्यों में कोयला का स्टॉक चिंताजनक स्तर पर पहुँच गया है. 10 दिन से लगातार छह हजार मेगावाट बिजली की कटौती हो रही है.

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में भयंकर गर्मी के पूर्वानुमानों, सभी औद्योगिक इकाइयों के कोविड पूर्व स्तर पर लौटने और कोयले की स्थिति देखकर कम से कम 15 राज्यों में बिजली संकट की आशंका जताई जा रही है. सेंट्रल पावर अथॉरिटी के अनुसार, देश में 173 पावर प्लांट्स हैं, इनमें फिलहाल नौ में बिजली उतपादन नहीं किया जा रहा है. वहीं 14 आयातित कोयले से चलते हैं. शेष 150 में से 85 के पास महज 7-10 दिन का ही कोयला बचा हुआ है. 105 के पास भंडारण क्षमता का 25 फीसदी कोयला है. आपको बता दे कि ऐसी ही स्थिति पिछले साल सितंबर-अक्तूबर में पैदा हुई थी लेकिन उस वक्त कोयले के भीगे होने के कारण कोयला निकालने की प्रक्रिया बाधित होने का हवाला दिया गया था.

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