साहिबगंज में बर्बादी की कहानी: सैकड़ों साल पुराने शिवालय पर भट्टा संचालकों की नजर

सैकड़ो साल पुराने शिवालय का इंसानी लालच ने ऐसा हाल बना दिया
सैकड़ो साल पुराने शिवालय का इंसानी लालच ने ऐसा हाल बना दिया

बरहड़वा (साहिबगंज) । फरक्का एनएच किनारे बरहड़वा अंचल के मौजा सिरासीन थाना नं.159, मंदिर दाग नं.229, रकवा एक कट्ठा चार धूर पर सैकड़ो वर्ष पुराना शिवालय है। उक्त शिवालय की 20 बीघा देवत्तर भूमि का समय के साथ बंदरबांट कर लिया गया। वहीं इनदिनों शिवालय के भग्नावशेष पर भट्ठा संचालक नजर लगा अवशेष को जमीनदोज कर अतिक्रमण करने मे जुटे है। सीओ देवराज गुप्ता ने बताया कि ऐसा मामला संज्ञान मे नहीं है। उसके बाद भी मामले की छानबीन कर कार्रवाई संभव है।

अवैध कोयले की ताप से अवैध ईट भट्ठों की चिमनी से जहरीला धुआं 

नेशनल हाईवे किनारे सैकड़ो की संख्या में चल रहे हैं ईट भट्टे
नेशनल हाईवे किनारे सैकड़ो की संख्या में चल रहे हैं ईट भट्टे

एनएच के बरहड़वा फरक्का पथ पर दर्जनभर ईट भट्ठों की चिमनी से दिन रात निकलता जहरीला धुआं का असर दिखने लगा है। एक साल पूर्व तक बरहड़वा समेत आसपास के क्षेत्रो का एक्यूआई सामान था जबकि इनदिनों खतरें के निशान से ऊपर है। वायु को दूषित करने मे पत्थर खदान व क्रेशरों, पत्थर चिप्स परिवहन करने वाले हजारों ट्रकों के साथ ईट भट्ठा अहम भूमिका निभा रहे है।

जानकारी रहे की बरहड़वा फरक्का मुख्य व ग्रामीण पथ के किनारे उपजाऊ खेतीहर जमीन पर संचालित चिमनी ईट भट्ठें सरकारी नियमों के मुताबिक कोई भी उद्योग धंधा नहीं लगाया जा सकता और नहीं सरकार या प्रशासन ऐसे किसी उद्योग की स्थापना की अनुमति ही दे सकते है। उसके बाद भी कई चिमनी ईट भट्ठा संचालकों का दावा है की पर्यावरण और माइनिंग विभाग से एनओसी प्नाप्त है। सूत्रों की माने तो अगर अनुमति प्राप्त है तो इसकी दो वजह हो सकती हैं एक उद्योग मालिक ने जमीन के कृषि उपयोगी होने की जानकारी छिपायी या फिर पर्यावरण विभाग ने इसकी अनदेखी की दोनों ही स्थिती में चिमनी ईट भट्ठा लगाना पूरी तरह अवैधानिक व गैरकानूनी है। जबकि जमीन का फैसला राजस्व विभाग ही कर सकता हैं जिसकी सुप्रिम एथारटी जिले के उपायुक्त होते है। इस प्रकार की जमीन पर कोई इंड्रस्ट्रीज लगाये जाने से पहले राजस्व अनुमति भी होना जरुरी है। इसके लिये जमीन का डायवर्सन कराया जाना अनिवार्य है। इससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की प्राप्ती होती लेकिन जमीन का डायर्वसन कराये बीना ही उद्योग लगा लिया गया इस तरह लाखों रुपये राजस्व की चोरी की गयी और सरकार व प्रशासन से धोखाधड़ी कर उद्योग की स्थापना की गयी जो एक अपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता हैं । इस उल्लधंन के परिपेक्षय में प्रशासन चाहें तो एफ आईआर के साथ भट्ठों को सील कर जुर्माना वसूल कर सकती हैं।

आश्चर्य की बात तो यह हैं की सारा गोरखधंधा उद्योग विभाग की शह पर हुआ जिसने नियम विरुध्द तरीके से फेक्ट्री को जमीन के ड्रायवर्सन न कराने का पत्र जारी कर दिया जबकी उद्योग विभाग को ऐसा कोई अधिकार हैं ही नहीं जमीन संबधित अधिकार सिर्फ राजस्व विभाग को ही हैं वही तय करता हैं कि किस जमीन का डायर्वसन किया जायेगा किसका नहीं उसकी एनओसी के बिना जिले में कोई भी फेक्ट्री व उधोग नही लग सकते। इसलिए जब भी किसी उद्योग के लिये भू अर्जन होता हैं तो उसकी सूचना राजस्व विभाग ही जारी करता है। और किसी भी विवाद का निपटारा राजस्व न्यायालय में ही किया जाता है। एनएच के किनारे प्रदूषण फैलाते ईट भट्ठों द्वारा राजस्व नियमों का कोई पालन नहीं किए जाने से पर्यावरण विभाग के अधिकारी बोर्ड के सदस्य व सचिव समेत एनजीटी में मामला लेजाने के लिए सामाजिक संगठन ने खाका तैयार कर लिया है।

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