डोजरिग के नाम पर वन विभाग सिर्फ कर रहा है खानापूर्ति

माइका के अवैध खदान में बच्ची की मौत  मामले में एसडीपीओ ने जॉच में कहा- पूरी खदान ही वनभूमि।

वन क्षेत्र पदाधिकारी वनभूमि मानने से कर रहे थे इंकार।

गिरिडीह अमित सहाय

रेंजर अनिल पासवान के निर्देश पर वन विभाग के कर्मियों ने माइन्स का डोजरिंग किया। माइन्स के मुंह के अलावा रास्ता को काट दिया गया है। हालांकि माइन्स का डोजरिंग जिस प्रकार की गयी है वह केवल खानापुर्ति ही प्रतीत हो रहा है। वन विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। इस संबंध में वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि कोई खानापूर्ति नहीं किया गया है। इस माइन्स को डोजरिंग करने में बहुत अधिक समय लगेगा। माइन्स का मुंह बंद कर दिया है और रास्ते को काट देने से इस माइन्स का कोई उपयोग नहीं कर पायेगा।

जिनके कंधे पर जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी है उन्हें ही अपने वन सीमा का पता नहीं।

सुत्रो के अनुसार जिनके कंधे पर जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी है उन्हें अपने वन क्षेत्रों की सीमा का भी पता ही नहीं। खदान के जिस हिस्से में ढिबरा के ढेर के गिरने से बच्ची की मौत हुई। तीसरी वन क्षेत्र पदाधिकारी घटना स्थल को वनभूमि से बाहर बताकर बच रहे थे। तिसरी के वन क्षेत्र पदाधिकारी यह मानने को तैयार नहीं कि घटनास्थल वनभूमि में पड़ता है।

 पुलिस जांच में पाया कि खदान अवैध रूप से वनभूमि इलाके में संचालित था।

एसडीपीओ मुकेश महतो समेत कई पदाधिकारी तिसरी के बेरगियातरी पहुँच कर जांच में पाया कि माइका खदान अवैध रूप से वनभूमि इलाके में संचालित है। जांच के दौरान पाया कि माइका खदान वनभूमि इलाके में पड़ने के बाद भी वन क्षेत्र पदाधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई न किये जाने से हैरानी जताया है। डोजरिग के दौरान स्थल पर वनकर्मी पवन विश्वकर्मा, प्रियेश विश्वकर्मा ,पवन चौधरी, अभिजीत रजक,अशोक यादव  मौजूद थे।

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