The farmers, who were stuck with the demand to give the register to and Khatian without bribes

बिना घूस के रजिस्टर टू और खतियान देने की मांग को लेकर डटे रहे किसान, प्रशासन के आला अधिकारी नहीं लिया सूद।
गिरिडीह जिले में पिछले 15 दिनों से खुले आसमान के नीचे अम्बेडकर चौक गिरिडीह में किसान बिना घूस के रजिस्टर टू और खतियान देने की मांग को लेकर चपरडीहा मौजा कमिटी की अध्यक्षा रानी देवी के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना पर डटे हुए हैं। विदित हो कि गिरिडीह के आला अधिकारी इस मामले को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। किसान अपनी मांगो को लेकर अनिश्चितकालिन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। अपने इस गंभीर समस्या के समाधान को लेकर कई बार संबधित पदाधिकारी से मुलाकात भी किये आश्वासन मिला लेकिन आज भी समस्या बना हुआ है। अंचल अधिकारी किसान से जमीन संबंधित किसी जॉच के लिए रजिस्टर्ड।। एवं खतियान का मांग किया जाता है।
वही जिला अभिलेखागार किसान को रजिस्टर्ड।। एवं खतियान देने में असमर्थता जाहिर करते रहा है।
धरना को संबोधित करते हुए किसान मंच के गिरिडीह जिला अध्यक्ष सह अधिवक्ता अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि गिरिडीह जिला के माननीय विधायकों द्वारा किसानों के इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु कोई पहल नहीं करने व आंदोलन- कारी किसानों का घोर उपेक्षा किए जाने से ना सिर्फ किसान नाराज है बल्कि सभी विधायक  के पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता भी काफी दुखी हैं पर चुनावी वर्ष आने से पहले हमारे माननीय अपने पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का भी नहीं सुनते हैं। भ्रष्ट पदाधिकारी व चापलूस कार्यकर्ता के झूठी प्रशंसा से वे इतने मदहोश हो गए हैं।
1932 के खतियान के आधार पर हेमंत सरकार के मंत्री स्थानीय नीति लागू करने की बात कह रहें हैं पर स्थानीय नीति का लाभ लेने के लिए खतियान और रजिस्टर टू दोनों जरूरत है।
किसान मंच के संरक्षक अजित सिन्हा ने कहा कि 1932 के खतियान के आधार पर हेमंत सरकार के मंत्री स्थानीय नीति लागू करने की बात कह रहें हैं पर स्थानीय नीति का लाभ लेने के लिए खतियान और रजिस्टर टू दोनों जरूरी है पर हेमंत सरकार के अधिकारी बिना घूस का नकल देने को तैयार नहीं है। धरना में रानी देवी, मुंशी मुर्मू, प्रेम मुर्मू, सुंदर मुर्मू, हिरोमुनी देवी, मंझली देवी, कविता देवी, बिरालाल हेंब्रम, महालाल बासके, मंजू मरांडी, विकाश मुर्मू, कुंजल कुम्हार, कुंजल पंडित, गणेश सिंह, बाजो सिंह, हेमलाल सिंह, देवी सिंह, नागेश्वर सिंह, मसुदन सिंह, छोटेलाल मरांडी, रोहित कुमार यादव, अजित कुमार, हदीश अंसारी, गोने टुडू, बीरबल टुडू, जेठा टुडू, हरिलाल मुर्मू, शोरेबे किस्कू, सहित कई किसान बैठे हुए हैं।

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