भाषा के मामले में फैसला हो चुका, अब 1932 का खतियान लागू होगाः जगरनाथ महतो

1932 के आधार पर लागू करेंगे स्थानीय नीति
1932 के आधार पर लागू करेंगे स्थानीय नीति- शिक्षामंत्री

रांची । शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि भाषा के मामले में विपक्ष चाहे जितना शोर मचा ले। अब इसमें कुछ नहीं हो सकता। हेमंत सोरेन की सरकार भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के सामने घुटने नहीं टेकेगी। जगरनाथ महतो ने कहा कि भाजपा क्या चाहती है, झारखंड का बच्चा-बच्चा समझता है. इनकी राजनीति झारखण्ड में नहीं चलने वाली। अभी तो बिहारी भाषा को बाहर किया है, अब तो 1932 के खतियान की बारी है।

उर्दू के बहाने अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रही है भाजपा
जगरनाथ महतो ने कहा कि तमाम झारखंडी चाहे वो लरना आदिवासी हो, मूलवासी हो, ईसाई हो या मुसलमान। ये सब हेमंत सरकार के फैसले के साथ हैं। उर्दू को सभी जिलों में क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने पर जगरनाथ महतो ने कहा कि जो भाषा हर जिले में बोली जाती है, उसे क्षेत्रीय भाषा का दर्जा मिलना ही चाहिए । वैसे भी उर्दू को पहले से ही क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता मिली हुई है।

1932 के आधार पर स्थानीय नीति बनाएंगे
जगरनाथ महतो ने कहा कि नियोजन नीति, भाषा विवाद सुलझाने के बाद सरकार अब नये सिरे से स्थानीयता को परिभाषित करेगी। उन्होने कहा कि यूपी-बिहार के लोग बिजनस कर सकते हैं, वे कमाने-खाने आएं हैं तो कमाएं, लेकिन सरकारी नौकरी उन्हें नहीं मिलेगी। झारखंड की नौकरियों पर झारखंडियों का हक है और ये हम दिलाकर रहेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन तमाम विवादों को सुलझाने के बाद सरकार बड़े पैमाने पर वैकेंसी निकालने वाली है।

झारखण्ड की जनता जो कहेगी झारखण्ड की सरकार वही करेगी।
झारखण्ड की जनता जो कहेगी, झारखण्ड की सरकार वही करेगी

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