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30 साल पहले ₹500 की रिश्वत लेने वाले सेवानिवृत्त ग्राम लेखपाल को 1 साल की सजा: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

बेंगलुरु:
करीब तीन दशक पहले ₹500 की रिश्वत लेने के आरोप में अब 70 वर्षीय सेवानिवृत्त ग्राम लेखपाल नगेनश डोंडु शिवांगेकर को एक साल की कठोर कैद की सजा सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई है। उन्हें अब बेलगावी के हिंडलगा केंद्रीय जेल में भेज दिया गया है।

यह मामला साल 1995 का है जब बेलगावी जिले के कडोली गांव के किसान लक्ष्मण रुक्कन्ना कटांबले से नगेनश ने उनकी कृषि भूमि के RTC (Record of Rights, Tenancy and Crops) दस्तावेज़ जारी करने के लिए ₹500 की रिश्वत मांगी थी।

लक्ष्मण ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत दी और नगेनश को रंगे हाथों पकड़वाया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।


⚖️ न्यायिक प्रक्रिया:

  • 2006: विशेष अदालत ने नगेनश को दोषी करार दिया और 1 साल की सजा व ₹1,000 जुर्माना लगाया।

  • 2012: कर्नाटक हाईकोर्ट के धारवाड़ सर्किट बेंच ने उन्हें बरी कर दिया।

  • 2025: लोकायुक्त पुलिस की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटा और असली दोष सिद्ध करते हुए सजा बहाल कर दी।


👤 अब लक्ष्मण जीवित नहीं हैं

इस फैसले का इंतज़ार कर रहे किसान लक्ष्मण का 5 साल पहले निधन हो चुका है।
कडोली गांव के लोग उन्हें उनके सामाजिक कार्यों के लिए याद करते हैं, जैसे चेन्नई बाढ़ राहत के लिए ₹5,000 का दान और मेधावी छात्रों को पुरस्कार देना।

लक्ष्मण के मित्र और किसान नेता अप्पासाहेब देसाई ने कहा,

“भले ही देर हुई हो, लेकिन न्याय मिला है। यह फैसला आम जनता के न्याय व्यवस्था में विश्वास को मज़बूत करेगा।

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