सुप्रीम कोर्ट ने योगेन्द्र साव की जमानत अर्जी खारिज की, तीन माह में ट्रायल पूरा करने का निर्देश

अदालत ने तीन माह में ट्रायल पूरा करने का दिया निर्देश
अदालत ने तीन माह में ट्रायल पूरा करने का दिया निर्देश

बहुचर्चित कफन सत्याग्रह व चीरूडीह गोलीकांड से जुड़ा है मामला

उज्ज्वल दुनिया संवाददाता/ अजय निराला

हजारीबाग। झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को बड़कागांव गोलीकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार दर दिया है। अदालत ने इस मामले का ट्रायल तीन माह में पूरा करने का निर्देश भी दिया है। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने भी 14 दिसंबर को उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। उसके बाद हजारीबाग स्थित बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री योगेंद्र साव सुप्रीम कोर्ट गए थे। वहां गुरुवार को उनकी जमानत याचिका खारिज हो गई। सुनवाई के दौरान योगेंद्र साव की ओर से कहा गया था कि इस मामले में सभी गवाही समाप्त हो चुकी है। बचाव पक्ष की ओर से गवाही हो रही है। इसके अलावा इस मामले में सूचक ने भी कहा है कि घटनास्थल पर योगेंद्र साव मौजूद नहीं थे। वह करीब साढ़े तीन साल से जेल में बंद हैं, इसलिए उन्हें जमानत की सुविधा मिलनी चाहिए। इस दौरान सरकार की ओर से उनकी जमानत का विरोध किया गया।

दरअसल एनटीपीसी के खनन के विरोध में ग्रामीण आंदोलन कर रहे थे। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई थी, जिसके बाद इन्हें भी मामले में आरोपी बनाया गया था। वर्ष 2016 को चिरूडीह खनन के रास्ते पर योगेंद्र साव सहित कई लोग कफन सत्याग्रह आंदोलन चला रहे थे। एनटीपीसी के खनन क्षेत्र के दोनों मार्ग को अवरूद्ध कर दिया गया था। विधि-व्यवस्था को ठीक करने के लिए उनकी पत्नी व पूर्व विधायक निर्मला देवी को बड़कागांव के मामले में गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उनके समर्थक पुलिस बल पर जानलेवा हमला करते हुए उन्हें छुड़ा ले गए। इसमें कई अधिकारी गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।

इस मामले में योगेंद्र साव पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और लोगों को उकसाने का मामला दर्ज किया गया है।
06 जनवरी 2022 को पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव को जमानत देने के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया, जिससे योगेंद्र साव को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही देश की शीर्ष अदालत ने तीन महीने के अंदर इस मामले का ट्रायल खत्म करने का निर्देश भी दिया है।

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