
उज्जवल दुनिया संवाददाता/ अजय निराला
हजारीबाग। उत्तरी छोटा नागपुर प्रमंडल के चतरा जिले में कल्याण विभाग के कार्यालय की ओर से छात्रवृति से जुड़े 70 करोड़ के दस्तावेज जला दिए गए। इस कारण ऑडिट के दौरान इस राशि के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं है। पुलों की स्थिति को देखते हुए सरकार से सेफ्टी ऑडिट कराने की अनुशंसा की गई है, ताकि दुर्घटना से बचा जा सके। पर्यटन विकास के नाम पर बिना मूल्यांकन किए ही भवनों सहित अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया। कई स्थानों पर सरकारी भवनों से निजी लोग पैसा कमा रहे हैं, लेकिन सरकार को कुछ नहीं मिल रहा है।
प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) इंदू अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन में सीएजी रिपोर्ट की चर्चा करते हुए यह बात कही। प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) ने जालसाजी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिला कल्याण पदाधिकारी ने अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से छात्रवृत्ति के पैसे का गबन किया गया।
सरकार ने जिले को 95 करोड़ रुपए दिए थे। इसमें से 85 करोड़ रुपए की ही निकासी हुई। 85 करोड़ में से 70 करोड़ रुपए के हिसाब-किताब से जुड़े दस्तावेज जला दिए गए। इसलिए ऑडिट के दौरान इस राशि के खर्च होने या नहीं होने का पता नहीं लगाया जा सका। जांच में सिर्फ 15 करोड़ रुपए के गबन का मामला पकड़ में आया।
जिला कल्याण कार्यालय में 12 बैंक अकाउंट चल रहे थे। हालांकि सरकार को सिर्फ तीन बैंक अकाउंट होने की जानकारी दी गई थी। जांच के दौरान छात्रवृत्ति की राशि वहां के कर्मचारियों और उनके रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर किए जाने का मामला पकड़ में आया। इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार कार्रवाई कर चुकी है।

