तीसरे मोर्चे के गठन के बाद सरयू राय ने की अरविंद केजरीवाल से मुलाकात

नई दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करते सरयू राय
नई दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करते सरयू राय

नई दिल्ली/ रांची। झारखंड की राजनीति में एक नया प्रयोग हो रहा है। पांच विधायकों ने पहले तीसरे मोर्चे के गठन का एलान किया, इसके बाद तीसरे मोर्चे के सबसे वरिष्ठ नेता सरयू राय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। इससे इस बात को बल मिला है कि सरयू राय और अरविंद केजरीवाल मिलकर झारखंड की राजनीति में एक नया प्रयोग कर सकते हैं। वैसे भी आम आदमी पार्टी पूरे देश, खासकर छोटे राज्यों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अगर केजरीवाल को सरयू राय और सुदेश महतो का साथ मिलता है तो झारखंड में भी आम आदमी पार्टी को संगठन खड़ा करने में मदद मिलेगी।

केजरीवाल और सरयू राय की राजनीति एक जैसी

अरविंद केजरीवाल और सरयू राय की राजनीति कई मायनों में एक जैसी रही है। दोनोें नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के अगुवा रहे हैं। दोनों नेताओं ने बड़ी पार्टियों के दिग्गजों को चुनाव में पटखनी दी है। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया तो सरयू राय ने भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को चुनाव में धूल चटाई है। दोनों एक तरह से एक्टिविस्ट रहे हैं, दोनों पढ़े-लिखे नेता हैं। आम आदमी पार्टी को झारखंड में सरयू राय से बड़ा और भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रूसेडर नहीं मिल सकता।

2024 को देखकर रणनीति तैयार कर रहे हैं सरयू राय

कई लोगों को ऐसा लग सकता है कि सरयू राय ने पांच विधायकों के साथ तीसरा मोर्चा तात्कालीक राजनीति को ध्यान में रखकर बनाया है, लेकिन सरयू राय के जेहन में कहीं ना कहीं 2024 का लक्ष्य है। सरयू राय के निकट सूत्रों की माने तो अगले दो सालों तक सरयू राय पूरे झारखंड में संगठन खड़ा करने की मुहीम में जुटेंगे। ये आम आदमी पार्टी के बैनर तले भी हो सकता है। इसमें केजरीवाल के सांगठनिक कौशल और फंड की भी मदद मिलेगी। सरयू राय को लगता है कि जिस तरह हेमंत सोरेन की सरकार चल रही है, उसके बाद अगले विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा होगा। झारखंड भाजपा खेमेबंदी का शिकार है। बाबूलाल मरांडी, रघुवर दास और अर्जुन मुंडा के स्वघोषित अलग-अलग गुट हैं। इनके अलावा निशिकांत दूबे और जयंत सिन्हा जैसे सांसद भी इस गुटबंधी के कभी-कभी असहज हो जाते हैं। इसी में आम आदमी पार्टी और सरयू राय को खुद के लिए मौका दिख रहा है।

कई दिलों के कार्यकर्ता सरयू राय के संपर्क में

सूत्र बताते हैं कि चाहे वो झामुमो हो या कांग्रेस या फिर सरयू राय की पुरानी पार्टी भाजपा। इन दलों के कई नेता केजरीवाल-सरयू राय की जोड़ी से प्रभावित हैं। फिलहाल इन दलों के बड़े नेताओं की जगह रणनीति जुझारू कार्यकर्ताओं को जोड़ने की है, जो मेहनत कर अपने लिए मुकाम बना सकते हैं। इसमें आजसू, गीताश्री उरांव और अमित महतो जैसों का भी समर्थन मिल सकता है। अगर झारखंड में सरयू राय भाजपा, झामुमो और कांग्रेस के अलावा कोई विकल्प खड़ा कर सकें तो ये ऐतिहासिक होगा। लेकिन ये सिर्फ शुरूआत है…. अभी दिल्ली दूर है, अगले ढाई सालों तक बहुत मेहनत करनी होगी। लेकिन इतना तय है कि इस संभावना को लेकर झारखंड के लोगों में एक उत्सुकता जरूर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.