साहिबगंज: ओवरलोडिंग स्टोन रैक आपूर्ति करने वाले रैक लोडर पर एक करोड़ से अधिक का जुर्माना

रेलवे के कई जांच अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध
रेलवे के कई जांच अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध

नीरज कुमार जैन/ब्यूरो

बरहड़वा के रेलवे साइडिंग से रेलवे रैक के जरिए अरबों रुपये का पत्थर ढूलाई अवैध तरीके से किए जाने का खुलासा तब हुआ जब 04 मई को पत्थर लोड रैक बंग्लादेश के दरशना के लिए प्रस्थान की और 10 मई को बंग्लादेश के रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने रैक मे ओवरलोडिंग होने की बात कह रैक लेने से इंकार कर दिया। फलतः रैक कल्याणी रेलवे स्टेशन पर खड़ी कर दी गई। इसकी सूचना मालदा रेल डिवीजन के वरीय अधिकारियों को दी गई। जहां मालदा डिवीजन के सीनियर डीसीएम ने रैक लोडिंग रेलवे स्टेशन के एसएम, रेलवे स्टेशन के माल गोदाम अधीक्षक को तलब किया और स्थिति की जानकारी ली। ऐसी बात नहीं है कि मालदा डिवीजन के अधिकारी ऐसे रैक लोडरों के कुकृत्यों से अनिभिज्ञ है। फिर भी लोडर को सुरक्षित करने के लिए वरीय अधिकारी ओवरलोडिंग के मामले को सिरे से खारिज करते हुए रैक से ओवरलोडिंग न होने की बात कर रहे है।

डीसीएम पवन कुमार ने बताया कि मालदा रेल मंडल मे मालदा, बड़हरवा, सकरीगली, साहिबगंज, शिवनारायणपुर, सुल्तानगंज और बाराहाट मे वेजब्रिज (Weighbridge) है। और एक भी रैक ओवरलोड (overloaded) नही जा सकती है। उसके बाद भी ओवरलोड रैक को कल्याणी स्टेशन पर रोके जाने के सवाल पर डीसीएम ने चुप्पी साध ली।

रेल सूत्रों की माने तो लोडर को सुरक्षित करने के लिए मालदा डिवीजन के तथाकथित वरीय अधिकारी मोटी रकम के लालच मे लोडर पर रेल मंत्रालय के अनुरूप ही जुर्माना लगाने की बात तो करते है वहीं डिवीजन के तथाकथित अधिकारी मंत्रालय द्वारा प्रदत्त शक्ति का इस्तेमाल करते हुए लोडर को जुर्माना की राशि जमा करने के लिए महिनों का समय उपलब्ध कराने की भी कार्रवाई कर रहे है। जबकि कायदे से जुर्माना राशि अदायगी के बाद ही लोडर रैक लोड करवा सकता है। ओवरलोड रैक के रोके जाने के बाद से लोडरो और मालदा डिवीजन के अधिकारियों मे खलबली मची हुई है।

सूत्रो की माने तो रेल डीआरएम मालदा और सीनियर डीसीएम मालदा मे गहरे और मधुर संबंध है। ऐसा काह जा सकता है कि डीसीएम जो कहेंगे वहीं डीआरएम साहब की आवाज होगी। सूत्रों की माने तो इस मामले में एक पासिंग एजेंट की भी भूमिका संदिग्ध है जिसपर भी जांच की आंच है। ओवरलोडिंग की शिकायत पर रेल मंत्रालय की ओर से विजीलेंस टीम ने 12 मई 2022 को बरहड़वा मालगोदाम पदाधिकारी से पूछताछ कर जरूरी कागजात अपने साथ ले गए है। सूत्रों की माने तो पत्थर लोडर पर एक करोड़ से अधिक रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही जुर्माना की राशि एक व दो सप्ताह के अंदर जमा करने का निर्देश दिया जा सकता है।

खनिज का जिम्स पोर्टल से निर्गत चालान का अभाव

सीएम और ग्राविमं के विस जिला मे ही नहीं संथाल परगना के रेलवे रैक लोडिंग प्वाइंट स्टेशनों मे झारखंड मिनरल (प्रिवेंशन ऑफ इल्लीगल माइनिंग ट्रांसपोर्टेशन एंड स्टोरेज) रूल्स-2017 के विरुद्ध हो रहा है रैक लोड। प्रावधान के तहत कोई भी खनिज का जिम्स पोर्टल से निर्गत चालान के बिना न तो खदान से कहीं परिवहन किया जा सकता है और न ही उसका स्थान परिवर्तन किया जा सकता है। लेकिन रेलवे के स्थानीय मुख्य यार्ड मास्टर, माल गोदाम अधीक्षकों और स्टेशन मैनेजरों द्वारा बिना जिम्स पोर्टल से निर्गत चालान के ही जिलों के माइनिंग डीलर और डिस्पैचर को आरआर (RR) निर्गत किया जा रहा है। फलतः नियम विरुद्ध खनिजों के परिवहन से सरकार को करोड़ों के राजस्व की क्षति हो रही है।

माइनिंग चालान और ओवरलोडिंग का खेल नया नहीं

बरहड़वा रेलवे रैक लोडिंग प्वाइंट से ओवर लोडिंग का मामला थमता नजर नहीं आ रहा है। भारत के विभिन्न प्रांतों के जिलों समेत बंग्लादेश पत्थर, चिप्स रैक से भेजा जाता है। जिससे रेल मंत्रालय को करोड़ो का राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन जिस हिसाब से रैक लोडिंग हो रही है उस अनुपात मे रेल मंत्रालय को राजस्व नहीं मिल रहा। मालदा डिवीजन के मिर्जाचौकी, साहिबगंज, सकरीगली, महाराजपुर, तालझारी, बाकुडी, बरहड़वा से मुख्यरूप से पत्थर चिप्स लोडिंग होती है। लेकिन रैक मे क्षमता से अधिक लोडिंग दी जा रही है। जिसमें मालदा डिवीजन समेत रैक लोडिंग प्वाइंट वाले रेलवे स्टेशन के अधिकारियों की मिलिभगत है। रेलवे का रैक वजन का कांटा बरहड़वा मे है। एमटी रैक के वजन के बाद लोडिंग रैक का कांटा पर लगाया जाता है। रैक मे लोड पत्थर चिप्स के वजन के लिए कांटा से 02 से 03 किमी के रफ्तार से लोडेड रैक को गुजरना है। लेकिन लोडर और रेलवे अधिकारियों की मिलिभगत से लोडेड रैक को 10 से 15 किमी की रफ्तार से गुजारा जाता है। फलतः वजन का प्रिंटर क्लियर प्रिंट नहीं दे पाता और इसी का फायदा लोडर उठा कर रैक मे क्षमता से अधिक लोड करवा रेल के साथ माइनिंग विभाग के राजस्व को क्षति पहुंचाने मे गुरैज नही कर रहे।

बंग्लादेश जाने वाली लोडेड रैंक से भारत सरकार को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है लेकिन इन लोडरो और तथाकथित रेलवे अधिकारी की मिलीभगत से रेल मंत्रालय समेत राज्य सरकार को भी राजस्व की भारी क्षति पहुंचा रहे है। इनदिनों रेल तो रेल सड़क और जल मार्ग से भी साहिबगंज जिला समेत संथाल परगना मे फैली राजमहल पहाड़ी श्रृंखलाओं का दोहन कर ओवर लोड कर खनिज संपदाओं का परिवहन हो रहा है।

पूर्व मे बिना माइनिंग चालान के रैक लोडिंग मामले मे कई लोडरों को हो चुका है जुर्माना

बगैर माइनिंग चालान के स्टोन आपूर्ति करने वालो के खिलाफ पूर्व मे करोड़ों का जुर्माना किया जा चुका है। उसके बाद भी रेलवे साइडिंग से रेलवे रैक के जरिए अरबों रुपये का पत्थर ढूलाई अवैध तरीके से किए जाने से लोडर गुरैज नही कर रहे। जानकारी रहे है कि पूूूर्व मे बिना माइनिंग चालान के अरबों रुपए का पत्थर रेलवे रैक के जरिए परिवहन कर सरकार को राजस्व की क्षति पहुंचाने का मामला काफी सुर्खियों में रहा था। इसको लेकर जिला खनन विभाग के द्वारा जांच करते हुए रेलवे के तथाकथित अधिकारियों को संलिप्ता पायी थी।

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