कई जिलों में भोजपुरी-मगही की मान्यता समाप्त, सभी जिलों की स्थानीय भाषा बनी उर्दू

धनबाद-बोकारो से भोजपुरी और मगही सूची से बाहर
धनबाद-बोकारो से भोजपुरी और मगही सूची से बाहर

रांची : भाषा विवाद को लेकर झारखंड की हेमंत सरकार बैकफुट पर आ गई। झगड़े को शांत करने की कोशिश की गई है। कई जिलों से भोजपुरी और मगही भाषा की मान्यता को समाप्त कर दिया गया। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने शुक्रवार देर रात नई अधिसूचना जारी की है।

धनबाद-बोकारो से भोजपुरी-मगही आउट
भाषा विवाद को लेकर जारी अधिसूचना में मैट्रिक और इंटर स्तर की प्रतियोगिता परीक्षाओं में जिला स्तरीय पदों के लिए नए सिरे से क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की सूची जारी की गई। इसके तहत धनबाद-बोकारो से भोजपुरी और मगही को हटाने की मांग को लेकर शुरू हुए आंदोलन को देखते हुए सरकार ने इन दोनों जिलों से भोजपुरी-मगही को हटा दिया है। वहीं, कई दूसरे जिलों से भी भोजपुरी-मगही को आउट कर दिया गया।

भाषा को लेकर जारी की गई नई सूची
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग ने 24 दिसंबर को जारी जिलेवार क्षेत्रीय-जनजातीय भाषाओं की सूची में संशोधन किया है। इसके तहत रांची में अब जनजातीय भाषा में कुड़ुख, खड़िया, मुंडारी, हो, संथाली और क्षेत्रीय भाषा में पंचपरगनिया, उर्दू, कुरमाली, बांग्ला को शामिल किया है। वहीं लोहरदगा में कुड़ुख, असुर, बिरजिया, उर्दू, नागपुरी, गुमला में कुड़ुख, खड़िया, असुर, बरहोरी, बिरजिया, मुंडारी, उर्दू, नागपुरी, सिमडेगा में खड़िया, मुंडारी, कुड़ुख, उर्दु, नागपुरी, पश्चिमी सिंहभूम में हो, भूमित, मुंडारी, कुड़ुख, कुरमाली, उर्दू उड़िया, सरायकेला में संथाली, मुंडारी, भूमिज, हो, पंचपरगनिया, उर्दू, उडिया, बांग्ला और कुरमाली को शामिल किया गया है।

नई लिस्ट में आदिवासी भाषाओं को तवज्जो
जबकि, लातेहार में कुड़ुख, असुर, बिरजिया, नागपुरी, उर्दू, मगही, पलामू में कुड़ुख, असुर, नागपुरी, मगही, भोजपुरी, गढ़वा में कुड़ुख, नागपुरी, मगही, उर्दू, भोजपुरी, दुमका में संथाली, माल्टो, खोरठा, बांग्ला, उर्दू, अंगिका, जामताड़ा में संथाली, खोरठा, उर्दू, बांग्ला, अंगिका, साहेबगंज में संथाली, माल्टो, खोरठा, उर्दू, बांग्ला, अंगिका, पाकुड़ में संथाली माल्टो, खोरठा, बांग्ला, उर्दू और अंगिका को जगह मिली है।

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