हेवी ब्लास्टिंग व खनन से राजमहल पहाड़ी श्रृंखलाओं का हो रहा दोहन

बिगड़ रहा पहाड़ी श्रृंखलाओं का प्राकृतिक सौंदर्य
बिगड़ रहा पहाड़ी श्रृंखलाओं का प्राकृतिक सौंदर्य

दुमका/ प्रतिनिधि

संथालपरगना मे राजमहल की पहाड़ी श्रृंखलाओं का अपना अलग ही महत्व है। ये श्रृंखलाएं प्राकृतिक की अनुपम छटा बिखेरती सी प्रतीत होती है लेकिन इनदिनों भू माफियाओं से लेकर वन कटवा गिरोह, पत्थर, कोयला के कारोबारी वर्तमान सरकार के संरक्षण पहाड़ी श्रृखलाओं का दोहन कर प्राकृतिक छटा पर ग्रहण लगा रहे है। वन विभाग हो या पर्यटन विभाग कुंभकर्णी निंद्रा मे है। फलतः प्रदेश में पहाड़ो के राजा कहे जाने वाले विलुप्ता के कगार पर है।

इनको बचाने के लिए अलग से विभाग व पदाधिकारी है। करोड़ों अरबों रूपये इनके संरक्षण समेत इनके बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए व्यय किये जा रहे है। उसके बाद भी न ही सही ढंग से संरक्षण मिल रहा है और न ही इनके बच्चों का भविष्य ही उज्वल हुआ। लेकिन इनके संरक्षण और बच्चों के भविष्य बनाने मे लगे विभाग, एनजीओ के पदाधिकारी का ठाटबाट व बच्चों का भविष्य निश्चय सुधरा प्रतीत हो रहा है। सीएम हेमंत सोरेन के विस क्षेत्र के पतना अंचल के ढिबरीकाँल के पहाड़िया आदिम जनजाति छात्रावास के नजदीक से हेवी ब्लास्टिंग से पत्थर खनन के साथ छात्रावास की चाहरदीवारी से सटा कर पत्थर क्रेशर मशीन का संचालन किसके निर्देश व आदेश पर हुआ यह यक्ष प्रश्न है।

वहीं रांगा सीएचसी के निकट पत्थर खनन होना और सीएचसी प्रभारी द्वारा इसकी शिकायत करना और कोई कार्रवाई न होना क्या इंकित करता है। बरहेट अंचल के बरमशिया, बांसपहाड़ का 85 फिसदी क्षेत्र वन विभाग का है जहां पिछले एक साल से हेवी ब्लास्टिंग कर खनन किया जा रहा है। इन पहाड़ों से भारी मात्रा मे वृक्षों की कटाई जारी है। पहाड़ी श्रृंखला के बीचोबीच बहने वाली गुमानी नदी से लगातार बालु खनन हो रहा है वहीं नदी मे पत्थर क्रेशर का कचरा, डस्ट वैगरह का निस्तारण होने से नदी पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है।

क्रेशरों से उड़ते धूल से खेती योग्य भूमि बंजर हो गई है। पूर्व मे पहाड़ों व पहाड़ की तलहटी मे आदिम जनजाति के लोग खेती करते थे। लेकिन पत्थर करोबारियों ने इनके पहाड़ों पर सिस्टम के तहत कब्जा कर लिया है। गोचर पर पत्थर, चिप्स, डस्ट वैगरह का भंडारण से मवेशियों को चराने की समस्या से मवेशी पालना भी बंद कर दिया। यह सिर्फ सीएम के विस क्षेत्र का हाल है। वैसे सीएम के विस जिला के बोरियो, राजमहल व बरहड़वा के कोटालपोखर मे राजमहल की पहाड़ी श्रृंखला का दोहन चरम पर है। फलतः पर्यावरण के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगता जा रहा है। राजमहल की पहाड़ी श्रृंखलाएं विलुप्त हो चूकी है तो कुछ विलुप्ता के कगार पर है। सरकार की तंद्रा समय रहते भंग न हुई तो राजमहल की पहाड़ी श्रृंखलाएं इतिहास के पन्नों पर सिमट कर रह जाऐगी।

साहिबगंज जिला मे खनन क्षेत्र हो या क्रेशर संचालन मे मानकों की अनदेखी साफ झलकती है। बरहड़वा-बाकुडी, धमधमियाँ, सकरीगली-साहेबगंज मुख्य पथ पर भी अनेकों पत्थर खदान व क्रेशर संचालित है। वहीं बरहड़वा-फरक्का एन एच के किनारे दर्जनभर चिमनी ईट भट्टा का संचालन है जिस पर भी सरकार के प्रतिनिधि व विभाग पूरी तरह से मौन है। ऐसी भी बात नहीं है कि गांव के लोगो द्वारा लिखित सूचना व शिकायत न की हो। पदाधिकारी भी कभी कभी चुनिंदे लोगो पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा लेते है।

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