प्लान बीः विधायकी गई तो बेटी को मांडर से चुनाव लड़वाएंगे बंधु तिर्की

कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं बंधु तिर्की
कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं बंधु तिर्की

रांची। बंधु तिर्की झारखण्ड की सियासत का बड़ा चेहरा हैं। आदिवासी राजनीति, आदिवासियों के हक की बात वे हमेशा करते रहे हैं। डोमिसाइल आंदोलन के दौरान बंधु तिर्की काफी सुर्खियों में रहे। रांची के मांडर विधानसभा सीट से झारखंड विकास मोर्चा के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीत कर आए। झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के भाजपा में जाने के बाद बंधु तिर्की की राहें अलग हो गईं। उन्होंने विधायक प्रदीप यादव के साथ मिलकर कांग्रेस का दामन थाम लिया। मौजूदा समय में बंधु तिर्की प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। उनके करीबी लोगों का कहना है कि अगर विधायकी गई तो मांडर सीट से अपनी बेटी को चुनाव लड़वा सकते हैं। ठीक वैसे ही, जैसा पूर्व कृषि मंत्री योगेन्द्र साव ने बड़कागांव से अपनी बेटी अंबा प्रसाद को चुनाव लड़वाया। अंबा प्रसाद भी कांग्रेस की ही विधायक हैं।

2019 के चुनाव में भाजपा के देवकुमार धान को हराया

वर्ष 2019 के चुनाव में उन्होंने BJP के उम्मीदवार देव कुमार धान को पराजित किया। उन्होंने जेल में रहते हुए नामांकन दाखिल किया था। ऐन चुनाव से पहले इन्हें झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिली। लेकिन तीन साल की सजा मिलने के बाद बंधु तिर्की की विधायकी खतरे में पड़ गई है। नियम तो यह है कि अगर किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा मिली तो वह अगले छः साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसे में बंधु के बचने का एक ही उपाय है कि उपरी अदातल सीबीआई कोर्ट के फैसले को पूरी तरह निरस्त करते हुए बंधु को बरी कर दे या फिर सजा दो साल से कम कर दे। मौजूदा परिस्थितियों में ये संभव नहीं दिखता क्योंकि बंधु तिर्की के खिलाफ सीबीआई ने बेहद पुख्ता सबूत इकट्ठे किये हैं।

पहले भी लगते रहे हैं आरोप

बंधु तिर्की पर लगातार अलग-अलग आरोप लगते रहे हैं। इसमें 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाले से लेकर पत्थलगड़ी तक के मामले शामिल हैं। 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाले में गिरफ्तारी से बचने के लिए बंधु तिर्की ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था लेकिन उन्हें अग्रिम ज़मानत नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्हें एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने रांची के सिविल कोर्ट परिसर से गिरफ्तार कर लिया था। वह सीबीआई कोर्ट में हाज़िरी देने पहुंचे थे। 2019 में उन्हें एसीबी की विशेष अदालत से ही विधानसभा चुनाव लड़ने की इजाज़त भी मिली। जिसके बाद उन्होंने जेल से ही चुनाव का नामांकन दाखिल किया।

जब-जब भ्रष्टाचार में फंसे, आदिवासी कार्ड का किया इस्तेमाल

बंधु तिर्की पर आरोप लगा कि उन्होंने पत्थलगड़ी के समर्थकों को भड़काऊ बयान देकर उकसाया। साथ ही उन पर आरोप है कि उन्होंने एक प्रेस कान्फ्रेंस में काली गाय की बलि देने की बात की थी। उनका ये वीडियो काफी वायरल हुआ था। उन्होंने राज्य की रघुवर सरकार को चुनौती दी थी कि यदि उसमें हिम्मत है, तो उन्हें काली गाय की बलि देने से रोक कर दिखाए। जिसके बाद उनके खिलाफ पुलिस ने शिकायत दर्ज की थी।

सेंट जेवियर से इंटरमीडियट

2019 से पहले वह मांडर विधानसभा सीट से बंधु तिर्की दो बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2014 में उन्हें बीजेपी की गंगोत्री कुजूर से हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2009 में बंधु तिर्की ने झारखंड जनाधिकार मंच के टिकट पर चुनाव जीता था। उससे पहले 2005 में यूजीडीपी के टिकट पर वो चुनाव जीते थे.। बंधु तिर्की सेंट ज़ैवियर्स कॉलेज से 1982 में इंटरमीडिएट पास हैं। रांची के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। वह झारखंड सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। आदिवासियों के मुद्दे पर वह अक्सर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने राजनीति की शुरुआत लालू प्रसाद यादव के मार्गदर्शन में किया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.