मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका, भाजपा ने सौंपा राज्यपाल को ज्ञापन

राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए भाजपा का प्रतिनिधिमंडल
राज्यपाल को ज्ञापन सौंपता भाजपा का प्रतिनिधिमंडल

रांची । भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेश बैंस से मुलाकात कर हेमंत सरकार के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के सा राज्यपाल को कुछ दस्तावेज भी सौंपे गये जिसमें आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पद पर रहते हुए रांची के अनगड़ा में अपने नाम से खनन पट्टा लीज पर लिया है ।

भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने 2008 में ही अपने पक्ष में मौजा-अंगारा प्लॉट संख्या 482 में 0.88 एकड़ क्षेत्र में स्टोन माइनिंग लीज के संबंध में खनन योजना की स्वीकृति मांगी थी जो विचाराधीन थी। मुख्यमंत्री बनते ही जिला खनन पदाधिकारी ने  10 जुलाई 2021 द्वारा उनके पक्ष में पत्थर खनन पट्टा स्वीकृत किया। तत्पश्चात उन्होंने अनगड़ा स्टोन जमा की पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करने के लिए 09 सितम्बर 2021 को अपनी व्यक्तिगत क्षमता में विधिवत हस्ताक्षर किए और फॉर्म -1 पीएफआर जमा किया। 22 सिम्बर 2021 को राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण, झारखंड की 92वीं बैठक में इसे विधिवत अनुमोदित किया गया था। खनन पट्टे के लिए आवेदन जो 2008 से लंबित था, 2021 में उसके सीएम के रूप में शामिल होने के बाद ही मंजूरी मिली, जो स्पष्ट रूप से सत्ता और स्थिति के दुरुपयोग के संदेह से परे साबित होता है।

हाइकोर्ट में याचिका दायर

शिवशंकर शर्मा नाम के शख्स ने इस मामले में झारखण्ड हाइकोर्ट में याचिका दायर किया है । याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री पर संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत अयोग्यता के प्रश्न की जांच करने का अधिकार है क्योंकि यह विधायिका के सदस्य के रूप में उनके चुनाव के बाद उनके द्वारा प्राप्त किया गया है। यह मुद्दा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (2015) 12 एससीसी 507 में तय किया गया है। इसलिए, अनुच्छेद 192 के तहत राज्यपाल को यह तय करना है कि क्या किसी विधायक ने अयोग्य घोषित करने वाली घटनाओं में से एक के होने पर किसी विशेष तारीख को अयोग्यता हासिल कर ली है। संविधान का अनुच्छेद 191 (i) (e), जैसा कि वर्तमान मामले में है।

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