दुर्लभ बीमारी एपिडर्मोलिसिस बुलोसा से पीड़ित हैं हिसीम के एक आदिवासी परिवार के तीन सदस्य

एक लाख में एक दो लोगों होती है यह जेनेटिक बीमारी
एक लाख में एक दो लोगों होती है यह जेनेटिक बीमारी

कसमार। दुर्लभ बीमारी एपिडर्मोलिसिस बुलोसा से पीड़ित हैं बोकारो जिले के कसमार प्रखंड अंतर्गत हिसीम गांव के एक ही आदिवासी परिवार के तीन सदस्य हैं। ये तीनों पति, पत्नी एवं पुत्र हैं। जगदीश मांझी (50), एतवारी देवी (45) तथा विरेन्द्र मुर्मू 15 वर्षीय है।

तीनों सदस्यों के पूरे शरीर में बड़े बड़े फफोले उठ गये है। 15 वर्षीय पुत्र विरेन्द्र का तो चेहरा ही विकृत हो गया है। जगदीश ने बताया कि बचपन में कम था दस वर्ष की उम्र से अधिक एवं बड़े बड़े फफोले उठने लगे। हालांकि इन फफोलों में सूजन या पीड़ा नहीं होती है लेकिन पूरे शरीर विकृत प्रकार का हो जाता है। चेहरे की बदआकृति हो जाती है।

बताया गया कि आदिवासी परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय है, फिर भी कुछ लोगों की सहायता से रांची, बोकारो, धनबाद में के चिकित्सकों से इलाज कराया लेकिन सुधार नहीं हुआ। 15 वर्षीय पुत्र विरेन्द्र को कैंसर हो चुका है। पति-पत्नि के चेहरे के विकृति देख कोई काम पर भी नहीं रखता है लोग देखते ही दूर होने लगते हैं। उन्हें सरकारी सहायता के तौर पर अंत्योदय राशन कार्ड एवं पेंशन का लाभ मिलता है।

कसमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ मानस कुमार कपरदार के अनुसार एपिडर्मोलिसिस दुर्लभ बीमारी एक लाख में एक दो लोगों पर होती है। माता या पिता के किसी जीन में गड़बड़ीया कमी होने के कारण संतान को ऐसी बीमारी होती है। शुरूआती दिनों में बेहतर ईलाज होने पर इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है।

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