ओबीसी की जनसंख्या 55 प्रतिशत, लेकिन आरक्षण सिर्फ 14 प्रतिशत क्यों : रामेश्वर उरांव

जातिगत जनगणना के समर्थन में है कांग्रेस
जातिगत जनगणना के समर्थन में है कांग्रेस- रामेश्वर उरावं

केरेडारी:-ओबीसी समुदाय को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने तथा जातीय जनगणना कराने की मांग को लेकर केरेडारी कृषि फार्म मैदान में एक दिवसीय महा सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन बड़कागांव विधानसभा विधायक अंबा प्रसाद के नेतृत्व में किया गया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, राज्य सभा माननीय सांसद धीरज प्रसाद साहू, डॉ प्रकाश साहू शामिल हुए।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए रामेश्वर उरॉव ने कहा आरक्षण बस नौकरी, शिक्षा के लिए नही बल्कि लोकतांत्रिक सरकार में हिस्सेदारी के लिए होता है। पूरे देश में 27 % आरक्षण ओबीसी का है और झारखंड में मात्र 14 % है जबकि उनकी जनसंख्या करीब 55% है ।  1990 में भारत मे ओबीसी की आरक्षण 27% मिली थी। देश में देखें तो रोजगार, शिक्षा, सरकार, सभी में ओबीसी को 27% आरक्षण है लेकिन झारखंड में मात्र 14%है। सरकार को प्रदेश में कार्य करने वाली कंपनियों को स्थानीय लोगो को 75 रोजगार मुहैया कराना है। ओबीसी को इसमें उनके हक के अनुसार आरक्षण मिलना बिल्कुल नयासंगत है।

जातीय जनगणना के संबंध में माननीय मंत्री ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हमारी सरकार का प्रतिनिधिमंडल केंद्र को ज्ञापन सौंप चुका है। हम फिर से केंद्र सरकार से जातीय जनगणना कराने की मांग करते हैं।

झारखंड गठन के पहले की तरह ओबीसी को मिले आरक्षण – धीरज साहू

सांसद धीरज साहू ने कहा कि जब बिहार था तब आरक्षण 27% था झारखण्ड अलग होने पर 14 % कर दिया गया। बिहार में तो ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 34% कर दिया गया पर झारखंड में 27% आरक्षण को आधा करके 14% कर दिए। पहले के आधार पर झारखंड के ओबीसी समुदाय के लोगो को आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा आप सभी से अपील है कि विधायक अम्बा प्रसाद की इस मुहिम को सपोर्ट करें और आरक्षण की लड़ाई को बुलंद करें।

पिछले 20 वर्षों से ओबीसी समुदाय के साथ हो रहा अन्याय – अंबा प्रसाद

ओबीसी को उनकी जनसंख्या के अनुपात में मिले आरक्षण-अंबा प्रसाद
ओबीसी को उनकी जनसंख्या के अनुपात में मिले आरक्षण-अंबा प्रसाद

विधायक अम्बा प्रसाद ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से पिछड़े वर्ग के लोगो के साथ काफी अन्याय हुआ है। ओबीसी आरक्षण को घटाकर आधा कर दिया गया। जिन राज्यों में ओबीसी हैं, उन राज्यों में सबसे कम आरक्षण हमारे प्रदेश में ही दिया गया है। हम सभी इसे ठीक करने के लिए झारखंड के हर जिले में आवाज बुलंद करेंगे। प्रदेश के हर जिले में जाकर में ओबीसी के आरक्षण को जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाने की मांग को लेकर समर्थन मागूंगी। इस अन्याय के विरुद्ध सभी समुदाय और धर्मों के लोग पिछड़े समाज को न्याय दिलाने के लिए आगे आएंगे।

उन्होंने कहा कि झारखंड अलग होने के 20 साल बाद भी झारखंड के ओबीसी को आरक्षण मात्र 14% ही मिला है जबकि बिहार और महाराष्ट्र में 34%, यूपी, छत्तीसगढ़ और अन्य कई राज्यों में 27%, केरल में 40%, तमिलनाडु में 50% तक आरक्षण मिला है ओबीसी को। इतना कम आरक्षण होने के कारण ओबीसी समुदाय विकास में और पीछे होता जा रहा है। नीचे से लेकर उच्च पद पर ओबीसी समुदाय के लोग बहुत कम ही लोग नजर आते हैं जबकि ओबीसी की राज्य में जनसंख्या 55% है।

जातीय जनगणना की मांग उठाते हुए अंबा प्रसाद ने कहा जातीय जनगणना कराने से केंद्र सरकार क्यों डर रही है। जनगणना हुई तो राज्य में ही नहीं पूरे देश में यह सच्चाई सामने आ जाएगी कि ओबीसी को आबादी 60% है। मैं झारखंड सरकार और माननीय मुख्यमंत्री जी को जातीय जनगणना के लिए की गई पहल के लिए धन्यवाद देती हूं। साथ में सभी ओबीसी समुदाय की तरफ से अपील करती हूं कि सरकार छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्य की तरह अध्यादेश लाकर ओबीसी समुदाय को उनकी जनसंख्या के अनुपात में तत्काल आरक्षण बढ़ाए। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्य यदि पिछड़े समाज के हित के लिए 50% आरक्षण की अधिसीमा को पार सकते हैं तो हम क्यों नहीं। अंत में अंबा प्रसाद ने कहा कि जब तक ओबीसी समुदाय को न्याय दिलाने के समर्थन में हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

कार्यक्रम के मौके पर कांग्रेस ओबीसी जिला अध्यक्ष सुरजीत नागवाला, जिला सचिव महेश साव,प्रखंड अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता,विधायक प्रतिनिधि सुरेश साव,चंदन गुप्ता, द्रोपदी देवी,सुंदर गुप्ता,राम कुमार साए आशा देवी,जितनी देवी,मनोज सिंह,रामेश्वर साव,खुश्बू देवी, लीलाधन साव,असगर अली, कुलदीप तिवारी,राजेश्वर साव,मोहन साव,धीरेंद्र साव,संजीत साव, समेत कई लोग उपस्थित थे।

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