नंबर घोटाला: बीएनएस डीएवी बीएड कालेज गिरिडीह के फर्स्ट सेमेस्टर के सभी छात्रों को 282 नंबर ?

शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, नंबरबाजी में यह कैसा कमाल
शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, नंबरबाजी में यह कैसा कमाल

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बीएनएस डीएवी बीएड कालेज गिरिडीह के फर्स्ट सेमेस्टर रिजल्ट का मामला
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सत्र 2020-22 के सभी विद्यार्थियों का 282-282 समान अंक
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यह संयोग तो कतई नहीं, जांच का विषय
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उज्जवल दुनिया संवाददाता/ अजय निराला

हजारीबाग। विनोबाभावे विश्वविद्यालय अंतर्गत संचालित बीएन साहा डीएवी बीएड कालेज में सत्र 2020-22 के फर्स्ट सेमेस्टर के रिजल्ट का ऐसा मामला सामने आया है, जिसपर सवाल उठना लाजिमी है। इसमें सभी विद्यार्थियों के 282-282 समान अंक आए हैं। नंबरबाजी का यह कैसा कमाल है, जिससे शिक्षा व्वस्था पर बड़ा सवाल उठ रहा है। जानकारों की राय में यह महज संयोग नहीं हो सकता। निश्चित रूप से यह जांच का विषय है।

दरअसल सितम्बर से आफलाइन क्लास की अनुमति थी। बहरहाल परीक्षा लेने की जगह विद्यार्थियों को प्रमोट कर दिया गया। चार पेपर की परीक्षा
1.लिखित परीक्षा 80 नम्बर तथा इंटरनल नम्बर 20
पेपर 2.लिखित 80 और इंटरनल 20, पेपर 3, लिखित 40 और इंटरनल 20
पेपर 4.लिखित 40 और इंटरनल 20 नंबर की परीक्षा थी। इस प्रकार लिखित का कुल अंक 240 और इंटरनल का 60, इसके अतिरिक्त, इपीसी का 50 नंबर था। यानी 350 नम्बर में एक्जाम सेंटर से 240 और कालेज देता है 60+50=110 नंबर।

कालेज इस 110 नम्बर में नंबर देने के लिए आंतरिक परीक्षा लेती है। इसमें स्टूडेंट के अनुशासन, आचरण, उपस्थिति, प्रोजेक्ट रिपोर्ट आदि को ध्यान में रखती है। इस परीक्षा के लिए फार्म भरवाया गया था 16.8.21-24.821 तक। दंड शुल्क के साथ 25.8.21-26.8.21 तक परीक्षा आवेदन भरवाया गया था। परीक्षाफल 24.10.2021 को प्रकाशित हुआ।

कालेज से इंटरनल नंबर देने के बाद उसे विभावि भेज दिया गया। अन्य नंबर विभावि से दिया गया। रिजल्ट पर सवाल उठाया जा रहा है कि विभावि को इसे परखना चाहिए था। इस मामले पर विभावि के परीक्षा नियंत्रक डा. गौरीशंकर तिवारी ने कहा कि इसमें पूरी तरह से यूजीसी नार्म्स का अनुपालन किया गया है।
नियम है कि कोविड काल में सभी को प्रोमोट करना है और पिछले अंक के अनुसार नंबर देना है।  चूंकि यह फर्स्ट सेमेस्टर था, तो इसके पहले का कोई अंक विद्यार्थियों को नहीं था। ऐसे में कालेज के इंटरनल परीक्षा के अंक को आधार बनाया गया।

कालेज के इंटरनल परीक्षा के अंक समान थे। विभावि उसमें किसी के अंक को ऊपर-नीचे नहीं कर सकती थी। कालेज को चाहिए था कि अंकों में वेरिएशन करता, जो नहीं था।

B n sah

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