टंडवा में एनटीपीसी की दो टूक, एक ही जमीन का बार-बार नहीं मिलता मुआवजा, रैयतों का आंदोलन गैरकानूनी

रैयत 2004 में अधिग्रहण की गई भूमि का आज के दर से मांग रहे मुआवजा- एनटीपीसी
रैयत 2004 में अधिग्रहण की गई भूमि का आज के दर से मांग रहे मुआवजा- एनटीपीसी

चतरा : टंडवा में एनटीपीसी रैयतों व ग्रामीणों द्वारा हमला व आगजनी मामले में एनटीपीसी के मुख्य संपदा अधिकारी एनजे सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होने रैयतों और ग्रामीणों के आंदोलन व मांगो को नियमविरुद्ध बताते हुए कहा कि रैयत 2004 में अधिग्रहित भूमि की आज के रेट से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। ये कही से भी उचित नही है ।

एनजे सिंह ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में रैयतों की मुआवजा वृद्धि की मांगों को नहीं माना जाएगा । उन्होंने बताया कि जिस वक्त भूमि अधिग्रहण हुआ था, उसी वक्त रैयतो ने मुआवजे को लेकर ग्राम विकास सलाहकार समिति के साथ लिखित सहमति एकरारनामा किया था। इसकी प्रति बकायदा दोनों पक्ष के पास है । अब बार-बार हिंसक आंदोलन के ज़रिए इसमें बदलाव की मांग करना गैर-कानूनी है ।

एनजे सिंह ने यह भी बताया कि भू-अर्जन अधिनियम के तहत जिला प्रशासन ने सवा तीन लाख रुपया प्रति एकड़ की दर से भूमि का अधिग्रहण किया था । एनटीपीसी ने दरियादिली दिखाते हुए एकरूपता के तहत सभी रैयतों के बीच 15-15 लाख रूपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजे का भुगतान किया है ।  2015 में ही एनटीपीसी के नाम जमीन का दाखिल-खारिज हो चुका है । प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है । एनटीपीसी में अब भूमि अधिग्रहण संबंधी सभी कार्यों को बंद किया जा चुका है । उन्होने कहा कि एक ही जमीन का बार-बार मुआवजा नही मिलता ।

Leave a Reply

Your email address will not be published.