
नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति समृद्ध पारंपरिक भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल का सम्मिश्रण है, जो भारत को ज्ञान महाशक्ति और भारतीयों को वैश्विक जरूरतों के अनुरूप कुशल-सक्षम बनायेगी। अन्नपूर्णा देवी मंगलवार से शुरू हुए शिक्षक पर्व कॉन्क्लेव के तकनीकी सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार करनेवाली कमिटी के अध्यक्ष पद्म विभूषण डॉ. के. कस्तूरीरंगन ने की।
इस अवसर पर अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में गुणवत्ता शिक्षा पर विशेष ज़ोर है। छात्रों को केवल विषय का ज्ञान दे देना पर्याप्त नहीं है। बल्कि सभी के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व पर जोर दिया जा रहा है। मेरा मानना है कि यह बदलती परिस्थितियों में और दिन-प्रतिदिन बदलती तकनीकी दुनिया के साथ चलने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कोविड-19 महामारी ने शिक्षा के डिजिटल माध्यम में बदलाव को आवश्यक बना दिया है। पीएम-ई-विद्या और एन-डियर जैसे इनिशिएटिव बहुत महत्वपूर्ण है । आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस , रोबोटिक्स जैसी तकनीकी का प्रयोग संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी।
उन्होने कहा कि सभी को शिक्षित करने की एक बड़ी जिम्मेदारी हम सब पर है। जिसके लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। वयस्कों के सीखने के लिए गुणवत्तापूर्ण तकनीक आधारित विकल्प जैसे ऐप्स, ऑनलाइन मॉड्यूल, उपग्रह आधारित टीवी चैनल, ऑनलाइन पुस्तकें और इंटरनेट से सुसज्जित पुस्तकालय और प्रौढ़ शिक्षा केंद्र आदि विकसित किए जाएंगे।
उन्होने कहा कि शिक्षा केवल शिक्षित ही नहीं करती, अपितु राष्ट्र का निर्माण भी करती है। वैश्विक नागरिक तैयार करने की परिकल्पना को सामने रखकर ही शिक्षा नीति का स्वरूप तैयार किया गया है। उन्होने कहा कि हम उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं। जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक पेशे में ही नहीं टिका रहेगा। इसके लिए उसे निरंतर खुद को रि-स्किल और अप-स्किल करते रहना होगा।

