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नमाज़ Vs हनुमान चालीसा प्रकरण: क्या कहती है बोकारो की जनता?

बोकारो में नमाज़ बनाम हनुमान चालीसा के मुद्दे पर जबरदस्त ध्रुवीकरण
बोकारो में नमाज़ बनाम हनुमान चालीसा के मुद्दे पर जबरदस्त ध्रुवीकरण
शंभूनाथ पाठक/ उज्ज्वल दुनिया संवाददाता  
बोकारो । राज्य विधानसभा के अध्यक्ष द्वारा अल्पसंख्यक विधायकों के लिए विधानसभा में नमाज पढ़ने को लेकर कमरा आवंटित करने के संदर्भ में जारी पत्र के बाद हो रहे जबरदस्त विरोध तथा इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए आंदोलन पर पुलिस द्वारा हुए लाठीचार्ज कि चारों ओर न सिर्फ निंदा हो रही है बल्कि सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप लग रहा है ।
इस मुद्दे को लेकर जहां एक और भारतीय जनता पार्टी राज्य के सभी जिलों में प्रखंड मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाकर विरोध जता रही है,  वही बहुसंख्यक समाज  अब चौक चौराहों पर इस मुद्दे पर यह चर्चा करने लगे  है कि हेमंत सरकार की तुष्टीकरण नीति से इन लोगों का भला होने वाला नहीं है।  जिससे इन लोगों को अब आने वाले समय में एक नई सोच के तहत रणनीति बनानी होगी ।
आम लोगों का कहना है कि सरकार के लिए यह प्रकरण गले की फांस बन गई है और तेजी से बदल रहे राजनीतिक समीकरण के कारण सरकार बैकफुट पर आ गई है और इन्हें डैमेज कंट्रोल करना ही होगा अन्यथा बहुसंख्यक समाज के कोप भाजन का शिकार हेमंत सोरेन सरकार को आने वाले समय में बनना पड़ सकता है ।
चर्चा के मुताबिक लोगों का कहना यह है कि छह दशक से कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति की जिसका खामियाजा अब कांग्रेस को भुगतना पड़ रहा है । स्थिति उसकी यह है कि क्षेत्रीय दल से भी नाजुक हालात के दौर से कांग्रेस गुजर रही है ।
भाजपा भी इस मुद्दे को अपने हित में पुरजोर तरीके से भुनाने का प्रयास कर रही है । भाजपा समर्थित लोगों का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार ने बहुसंख्यक की भावनाओं को नजरअंदाज किया है । इन लोगों ने तथा आम जनता ने भी इस संदर्भ में जारी किए गए पत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है ताकि समाज में बेहतर संदेश जा सके ।
बोकारो की जनता का यह भी कहना है कि ऐसे मुद्दे पर विधानसभा सत्र का समय नमाज और हनुमान चालीसा में बर्बाद हो गया । राज्य हित में जितने काम होने चाहिए थे नहीं हुए । जहां सत्ता पक्ष और सरकार हंगामे के कारण इस मुद्दे पर काम नहीं कर सकी, वहीं दूसरी ओर भाजपा के विधायक ढोलक झाल बजाने में पूरा का पूरा समय बर्बाद कर दिया ।
आम जनता का यह भी मानना है कि लोकतंत्र के मंदिर में धर्म के मुद्दे पर किसी तरह का हंगामा नहीं होना चाहिए इसका प्रभाव राज्य के विकास पर पड़ता है, समाज में वैमनस्यता बढ़ती है । इन मुद्दों को देखते हुए सरकार को इस मसले पर  शीघ्र कोई निर्णय लेना चाहिए ताकि समस्या का समाधान हो और राज्य का विकास निर्बाध गति से चलता रहे । अब देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला कहां जाकर ठहरता है ?
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