सांसद दीपक प्रकाश ने डीएसपी प्रमोद मिश्र के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला दर्ज कराया

अगर किसी सरकारी कर्मी ने संसद सदस्य की अवमानना की है तो उसकी नौकरी भी जा सकती है
अगर किसी सरकारी कर्मी ने संसद सदस्य की अवमानना की है तो उसकी नौकरी भी जा सकती है

नई दिल्ली । भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य सभा सदस्य दीपक प्रकाश ने राज्यसभा के सभापति एवम भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर झारखंड के एक पुलिस उपाधीक्षक प्रमोद मिश्रा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला दर्ज कराया। कुछ दिन पूर्व डीएसपी प्रमोद मिश्रा का एक ऑडियो वायरल हुआ था जिसमे उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद दीपक प्रकाश एवं पुलिस पदाधिकारी स्व रूपा तिर्की के खिलाफ भद्दी,अमर्यादित एवम असंसदीय भाषा का प्रयोग किया था।

किसी सांसद के लिए एक सरकारी कर्मी द्वारा अपशब्द का इस्तेमाल घोर अवमानना का मामला है। राज्य के एक वर्दीधारी पुलिस पदाधिकारी द्वारा ऐसा किया जाना घोर आपत्तिजनक जनक है। दीपक प्रकाश ने इस संबंध में विधिसम्मत कार्रवाई का अनुरोध किया।

हमेशा के लिए जा सकती है डीएसपी की नौकरी

संविधान में संसद और उसके सदस्‍यों के विशेषाधिकार का उल्‍लेख अनुच्‍छेद 105 में है। उसमें समूची प्रक्रिया और अवमानना पर सजा के प्रावधान भी हैं। संसदीय समिति के पास दोषी को जेल भेजने का अधिकार भी है।

क्या हैं एक सांसद के विशेषाधिकार और क्या है विशेषाधिकार लाने की प्रक्रिया ?

विशेषाधिकार हनन कब होता है, इसके बारे में कोई निश्चित नियम नहीं हें। कोई भी ऐसी कार्रवाई जो संसद या उसके किसी सदस्‍य को अपना कर्तव्‍य निभाने से रोके, या उसके चलते कर्तव्‍य निभाने में बाधा आए, विशेषाधिकार हनन के तहत आती है। लोकसभा स्‍पीकर 15 सदस्‍यों की विशेषाधिकार समिति का गठन करते हैं। यही कमिटी जांच करती है कि विशेषाधिकार हनन हुआ है या नहीं। इस वक्‍त बीजेपी के सुनील कुमार विशेषाधिकार समिति के प्रमुख हैं।

डीएसपी को सजा दिलाने के लिए 25 सांसदों का समर्थन जरुरी

अगर किसी सदस्‍य को लगता है कि उसे अपनी ड्यूटी करने से रोका जा रहा है तो वह विशेषाधिकार हनन का मामला उठा सकता है। सांसद को लोकसभा के महासचिव को उस दिन लिखित में सुबह 10 बजे से पहले सूचना देनी होती है। अगर 10 बजे के बाद सूचित करते हैं तो उसे अगले दिन की बैठक में शामिल किया जाता है। तय वक्‍त पर स्‍पीकर सांसद का नाम पुकारते हैं, तब सांसद अपनी बात रखते हैं। अगर कोई अन्‍य सदस्‍य प्रस्‍ताव पर आपत्ति जाहिर करता है तो स्‍पीकर प्रस्‍ताव के समर्थन वाले सांसदों से अपनी जगह पर खड़े होने को कहते हैं। 25 या उससे ज्‍यादा सदस्‍यों के खड़े होने पर प्रस्‍ताव पारित माना जाता है।

अधिकतम सजा क्या हो सकती है ?

अगर विशेषाधिकार समिति किसी को विशेषाधिकार या अवमानना का दोषी पाती है तो वह सजा की सिफारिश कर सकती है। सजा के तौर पर समिति संबंधित व्‍यक्ति को तलब कर उसे चेतावनी दे सकती है। समिति के बाद दोषी को जेल भेजने का अधिकार भी है।

पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कब-कब विशेषाधिकार हनन प्रस्‍ताव?

  • साल 2018 में तत्‍कालीन केंद्रीय राज्‍य मंत्री पोन राधाकृष्‍णन उस वक्‍त पतनमतिट्टा के एसपी रहे यतीश चंद्र के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्‍ताव लेकर आए थे। मंत्री का आरोप था कि पुलिस अधिकारी ने उनके साथ बदसलूकी की है।
  • साल 2011 में राज्‍यसभा सांसद रामगोपाल वर्मा और मोहम्‍मद अदीब पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्‍ताव लाए थे। उनका कहना था कि सांसदों के खिलाफ बेदी ने बेहद आपत्तिजनक टिप्‍पणियां की हैं।

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