झारखण्ड में 22 सालों में डायन के आरोप में 1 हजार हत्याएं

अक्सर संपत्ति विवाद को डायन बिसाही का रूप दिया जाता है- रिपोर्ट
अक्सर संपत्ति विवाद को डायन बिसाही का रूप दिया जाता है- रिपोर्ट

रांची: झारखंड में अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं की हत्या और उन पर अत्याचार की खबर लगातार आती रहती हैं । कभी छोटी घटनाएं तो कभी दिल दहला देने वाले बड़े वारदात को अंजाम दिया जाता है । आकड़ों के अनुसार राज्य में 22 वर्षों में 1 हजार से अधिक लोगों की डायन-ओझा के नाम पर हत्याएं कर दी गईं ।

हर साल औसतन 35 हत्याएं

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार पिछले सात वर्षों में डायन-बिसाही के नाम पर झारखंड में हर साल औसतन 35 हत्याएं हुईं हैं । अपराध अनुसंधान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में डायन बताकर 46 लोगों की हत्या हुई. साल 2016 में 39, 2017 में 42, 2018 में 25, 2019 में 27 और 2020 में 28 हत्याएं हुईं ।
2021 के आंकड़े अभी पूरी तरह कंपाइल नहीं हुए हैं, लेकिन इस वर्ष भी हत्याओं के आंकड़े करीब दो दर्जन बताये जा रहे हैं । इस तरह सात वर्षों का आंकड़ा कुल मिलाकर 230 से ज्यादा है । डायन बताकर प्रताड़ित करने के मामलों की बात करें 2015 से लेकर 2020 तक कुल 4556 मामले पुलिस में दर्ज किये गये । यानी हर रोज दो से तीन मामले पुलिस के पास पहुंचते हैं । बीते छह वर्षों में सबसे ज्यादा मामले गढ़वा में आये । यहां 127 मामले दर्ज किये गये । जबकि पलामू में 446, हजारीबाग में 406, गिरिडीह में 387, देवघर में 316, गोड्डा में 236 मामले दर्ज किये गये हैं । डायन हिंसा और प्रताड़ना का शिकार हुए लोगों में 90 फीसदी महिलाएं हैं ।

डायन कुप्रथा के पीछे अंधविश्वास और अशिक्षा के अलावा साजिश भी

डायन के आरोप में प्रताड़ना और हिंसा की घटनाएं अक्सर बर्बरता की तमाम हदें लांघ जाती हैं । महिलाओं को मैला खिलाने, निर्वस्त्र करने, बाल काटने से लेकर निजी अंगों पर हमले जैसी घटनाएं आये रोज झारखंड में मीडिया की सुर्खियां बनती हैं। सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनों से जुड़ी छंदोश्री कहती हैं कि डायन कुप्रथा के पीछे अंधविश्वास और अशिक्षा तो है ही, कई बार विधवा-असहाय महिलाओं की संपत्ति हड़पने के लिए भी उनके खिलाफ इस तरह की साजिशें रच दी जाती हैं । गांव में किसी की बीमारी, किसी की मौत, यहां तक कि पशुओं की मौत और पेड़ों के सूखने के लिए भी महिलाओं को डायन करार दिया जाता है ।

सरकार चला रही गरिमा परियोजना

झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनीष रंजन का कहना है कि डायन कुप्रथा उन्मूलन के लिए सरकार पिछले डेढ़ साल से झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के जरिए ‘गरिमा परियोजना’ चला रही है । डायन बताकर प्रताड़ित की गयी महिलाओं को न सिर्फ चिन्हित किया जा रहा है, बल्कि इन्हें सखी मंडल से जोड़कर स्वावलंबी बनाया जा रहा है । डायन कुप्रथा की पीड़ित महिलाओं के लिए काउंसलिंग, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की भी पहल गयी है । राज्य में अब तक डायन कुप्रथा से पीड़ित लगभग एक हजार महिलाओं की पहचान की गयी है । 450 से ज्यादा पीड़ित महिलाओं को सखी मंडल के जरिए आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़ा गया है, जबकि करीब 600 चिन्हित महिलाओं की मनोचिकित्सकीय काउंसलिंग की गयी है ।

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