झारखण्ड में साधन अपार ,पर अयोग्य सरकार: जयंत सिन्हा

खजाना खाली का बहाना छोड़, जमीन पर काम करे सरकार- जयंत सिन्हा
खजाना खाली का बहाना छोड़, जमीन पर काम करे सरकार- जयंत सिन्हा

भारतीय जनता पार्टी के हजारीबाग के सांसद व पूर्व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हेमन्त सरकार पर अयोग्यता का आरोप लगाया। जयंत सिन्हा ने कहा कि झारखण्ड सरकार के स्वयं के बजट के अनुसार उनके पास वर्ष 2021-22 में खर्च करने के लिये लगभग ₹ 91 हजार 277 करोड़ की राशि है, जिसमें लगभग ₹39 हजार 942 करोड़ का योगदान केंद्र सरकार कर और ग्रांट के रूप में दे रही है। पिछले वर्ष की तुलना में केंद्र सरकार का योगदान 19.62 प्रतिशत बढ़ा है।

उन्होने बताया कि इस वर्ष मोदी सरकार ने पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान की घोषणा की है। इसके अंतर्गत झारखण्ड को 50 साल के लिये लगभग ₹1 लाख करोड़ तक का ब्याज मुक्त ऋण विकास कार्यों के लिये मिल सकता है। यानि झारखण्ड सरकार के पास लाखों करोड़ों रुपए के अपार संसाधन हैं, लेकिन खर्च करने की सही नीयत नहीं है। इसलिए हम जनता की ओर से राज्य सरकार से पूछना चाहते हैं कि वो इन साधनों का क्या कर रही है?

झारखण्ड सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण विकास की योजनाएं ठप्प

जयंत सिन्हा ने कहा कि पिछले 5 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि झारखण्ड को लगभग ₹900 करोड़ का राजस्व घाटा उठाना पड़ा है, जो ये दर्शाता है कि झारखण्ड सरकार का वित्तीय प्रबंधन डामाडोल है। यही नहीं झारखण्ड पूरे देश में कैपिटल एक्सपेंडिचर में सबसे कम निवेश करने वाले राज्यों में से एक है। जहां हमारे पड़ोसी राज्य जैसे कि छतीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा अपने बजट का 19 प्रतिशत कैपिटल एक्सपेंडिचर पर खर्च कर रहे हैं, वहीं झारखण्ड का कैपिटल एक्सपेंडिचर दर मात्र 17 प्रतिशत है। जहां कोविड महामारी के समय दुनिया समेत देश के विभिन्न राज्य कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि नए अस्पतालों का निर्माण किया जा सके, बेहतर सड़कें बनाई जा सकें, बच्चों को शिक्षा दी जा सके, वहीं झारखण्ड सरकार इन सभी क्षेत्रों को अनदेखा कर रही है।

झारखंड सरकार की प्राथमिकताएं ही गलत

उन्होंने कहा कि इस सरकार की सारी प्राथमिकताएं ही गलत हैं। कैपिटल आउटले जिसके अंतर्गत विकासशील योजनाओं की फंडिंग होती है, उसे भी घटा दिया गया है। एस्टेब्लिशमेंट एक्सपेंडिचर जिसमें वेतन, पेंशन आदि पर होने वाले खर्चे शामिल हैं, उसे बढ़ा दिया गया है, जो तुलनात्मक रूप से हमारे पड़ोसी राज्यों से 10 प्रतिशत से ज्यादा है। झारखण्ड सरकार पर इस फिजूल खर्ची से कर्ज बढ़ता जा रहा है।

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