हेमंत सरकार का मकसद भाषाई विवाद खड़ा कर लोगों को आपस में लड़ाना है- कुणाल षाडंगी

अनावश्यक मुकद्दमेबाजी बढ़ाने वाली नियमावलियों से परहेज़ करे झारखंड सरकार : कुणाल षाड़ंगी
अनावश्यक मुकद्दमेबाजी बढ़ाने वाली नियमावलियों से परहेकरे झारखंड सरकार : कुणाल षाड़ंगी

झारखंड राज्य के हाई स्कूल और प्लस टू विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए तैयार नियमावली को विभागीय स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद विरोध और आलोचना तेज़ हो गई है। सूबे की मुख्य विपक्षी दल भाजपा के प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने शिक्षक नियुक्ति नियमावली के उस प्रावधान को जोड़ने पर कड़ा ऐतराज़ जताया है जिसमें राज्य सरकार ने झारखंड से मैट्रिक, इंटर पास होने को अनिवार्य किया है।

नियमावली पर सरकार के मंत्रियों को उचित विधिक परामर्श दे विधि विभाग : कुणाल षाड़ंगी

भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुआई वाली यूपीए गठबंधन सरकार को घेरने की तैयारी में है। भाजपा प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने सोमवार को शिक्षक नियुक्ति नियमावली में झारखंड से मैट्रिक, इंटर होना अनिवार्य करने के मसले पर सरकार को दो टूक में जवाब देते हुए कहा कि सरकार को नियोजन नीतियों में तुष्टिकरण से परहेज़ करनी चाहिए और लार्जर पब्लिक इंटरेस्ट को ध्यान में रखनी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि नियोजन नीतियों में सरलता रहनी चाहिए ना कि अड़ियलपन। कुणाल षाड़ंगी ने झारखंड सरकार और शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो को लगे हाथों सुझाव भी दे डाला कि अनावश्यक मुकद्दमेबाजी बढ़ाने वाली उबाऊ नियम बनाने से अब झारखंड सरकार को परहेज़ करनी चाहिए। सरकार के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय में केस की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है, इसका ख़राब असर सरकार की सेहत पर पड़ना लाज़मी है।

भाजपा प्रवक्ता कुणाल ने कहा कि राज्य के बाहर के स्कूलों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवा जो झारखंडी हैं, उनके बारे में भेद करने का सरकार का निर्णय भी कानूनी तौर पर वैध नहीं। कुणाल षाड़ंगी ने भोजपुरी, मगही, अंगिका, मैथिली सरीखे भाषाओं को जेएसएससी और जेटेट से हटाये जाने के नियम को भी असंवैधानिक और अपरिपक्व बताया। कहा कि राज्य की बड़ी आबादी के लिए उक्त भाषाएँ ही उनकी मातृभाषा है। हर वर्ग के भाषा, संस्कृति का सम्मान करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

झारखंड सरकार को संवैधानिक मूल्यों पर कुठाराघात करने से परहेज़ करना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने सरकार के विधि विभाग से इन नियमावलियों को लेकर सरकार के माननीय मंत्रियों तक उचित परामर्श और मंतव्य देने का आग्रह किया है ताकि भविष्य में ऐसे विभेदकारी नियमावली तैयार करने से झारखंड सरकार परहेज़ करे।

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