लालू के परिवार में “महाभारत” तो तय है, आज नहीं तो कल…

क्या छोटे बेटे को स्थापित करने के लिए लालू ने बड़ी बेटी और बड़े बेटे को अपमानित किया?
क्या छोटे बेटे को स्थापित करने के लिए लालू ने बड़ी बेटी और बड़े बेटे को अपमानित किया ?

बात उस समय की है जब तेज प्रताप यादव की पत्नी एश्वर्या भरी बरसात में घर के बाहर रोते बिलखते मीडिया के सामने आई…भींगा बदन, बिखरे बाल, बिना मेकअप के….ये तस्वीरें लालू प्रसाद यादव के परिवार पर सबसे बड़ा धब्बा थीं…राजनीति में ऊपर-नीचे चलता है..लंठई, रंगबाजी ये सब जनता पचा लेती है, लेकिन एक कुलीन घर की बेटी को आप बहू बनाकर लाये हैं, और फिर उसके साथ ऐसा सलूक ? बिहार में संभ्रांत घर का कोई भी यादव परिवार इसे ठीक नहीं मानता…

मीसा भारती को मिली सजा

खैर ये घटना लालू यादव की लोकप्रियता तले दब गई । एश्वर्या के पिता चंद्रिका राय अपमान का घूंट पीकर रह गये, भला वो कर भी क्या सकते थे ? बिहार के यादव लालू प्रसाद के परिवार के साथ जो थे । चंद्रिका राय बाद में जेडीयू में चले गये, लेकिन लालू परिवार के अंदर एक बात उस वक्त भी उठी थी । मीसा भारती और मां राबड़ी देवी ने मिलकर बहू एश्वर्या को सताया था, किचन के गेट बंद कर देतीं ताकि बहू खाना न ले सके । एश्वर्या के घर छोड़ने के बाद मीसा भारती पर भी परिवार के अंदर से ही नकेल कसा जाने लगा, उनकी राजनीतिक अरमानों के पंख कटने लगे। जो मीसा बार-बार मीडिया में आकर बयान देती थीं, विधानसभा चुनावों के पहले से ही उन्हे कह दिया गया कि अपना ससुराल संभालो, पार्टी तेजस्वी देख लेंगे । मीसा अपमान का घूंट पीकर रह गईं ।

बड़ी चतुराई से राजद के रणनीतिकारों ने मीडिया में तेज प्रताप की छवि "पप्पू" जैसी बना दी
बड़ी चतुराई से राजद के रणनीतिकारों ने मीडिया में तेज प्रताप की छवि “पप्पू” जैसी बना दी

तेज प्रताप को मीडिया और राजद के रणनीतिकारों ने “बुड़बक” घोषित करवा दिया

तेज प्रताप बड़े हैं। डिग्री भी इनकी तेजस्वी से ज्यादा है। आमतौर पर बिहारी घरों में बड़ा बेटा ही पिता का वारिस होता है। लेकिन लालू प्रसाद यादव की आशक्ति शुरु से ही छोटे बेटे तेजस्वी की ओर रही। बचपन से ही तेज प्रताप मां के लाडले, लेकिन पिता का प्यारा तो तेजस्वी ही रहा। तभी तो तेजस्वी ने दिल्ली के एमिटी में पढ़ाई की, लेकिन तेज प्रताप के हिस्से पटना का बीएन कॉलेज ही आया ।

तेज प्रताप पिता की नकल करते रहे, उनके पदचिन्हों पर चलने की कोशिश करते रहे, खुद को कृष्ण और छोटे भाई को अर्जुन बताते रहे, लेकिन सच्चाई तो ये है कि पिता की पार्टी पर धीरे-धीरे छोटे भाई तेजस्वी का कब्जा होता चला गया । पिछले विधानसबा चुनाव में तो हालत ये थी कि तेज प्रताप के कहने पर तीन लोगों को भी टिकट नहीं दिया गया जबकि तेजस्वी की पूरी मर्जी चली। सबसे बड़ी बहन की तरह बड़े भाई भी अपमान का कड़वा घूंट पीते रहे।

क्या दोनों बेटों के बीच मां-बाप करते रहे भेदभाव ?

तेज प्रताप के अंदर इस बात की टीस बहुत गहरे तक बैठी है कि मां-बाप भी उन्हे बुड़बक समझते हैं। लालू परिवार से जुड़े लोग कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि ये राजनीति में आने के बाद शुरु हुआ, बचपन में भी खासकर पिता लालू तेजस्वी को समझदार और तेज प्रताप को कम बुद्धिमान समझते रहे। छोटे भाई के और पिता के हाथों तेज प्रताप बार-बार अपमानित होना अच्छा नहीं लगता, लिहाजा वे सिर्फ मां और बहनों से ज्यादा बात करते, पिता से थोड़े दूर-दूर रहने लगे । तेज प्रताप को अपना भावनात्मक संबल मां में दिखता. राबड़ी देवी मां थी, वो अपने बेटे के दिल का हाल शायद समझती थीं, लिहाजा उन्होने तेज प्रताप को ज्यादा प्यार दिया ।

पिता और तेजस्वी की नाराजगी के बाद बहन के साथ रिश्तों की दुहाई देते दिखे तेज प्रताप
पिता और तेजस्वी की नाराजगी के बाद बहन के साथ रिश्तों की दुहाई देते दिखे तेज प्रताप

 

परिवार के नकारे, बहनों के सहारे

राजद से जुड़े एक बड़े नेता बताते हैं कि लालू प्रसाद तेज प्रताप से बेहद नाराज हैं। तेज प्रताप ने रविवार तेजस्वी से मिलने की बहुत कोशिश की लेकिन तेजस्वी के राजनीतिक सलाहकार संजय यादव ने मिलने नहीं दिया। जिस बड़े भाई को बाप और छोटे भाई ने ठोकर मार दी हो, वो कहां जाएगा ? लिहाजा रक्षा बंधन के बहाने तेज प्रताप वे बहनों के साथ अपने प्यार की दुहाई दी, उन्हें बचपन के दिन याद दिलाए और एक के बाद एक बहनों के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट की। लेकिन पिता और छोटे भाई से दार को बहनें कितना पाट पाएंगी, ये अगले कुछ दिनों के बाद ही पता चलेगा।

क्या मीसा और तेज प्रताप हाथ मिला सकते हैं ?

जबतक लालू जिंदा हैं, इसकी संभावना न के बराबर है। क्योंकि राजद लालू यादव की लोकप्रियता के सहारे चल रहा है. बिहार के यादव सिर्फ एक नेता को मानते हैं, वो हैं लालू यादव । कुछ हद तक ये सेंटिमेंटल वोटर हैं। हां, लालू के निधन के बाद क्या होगा, कहा नहीं जा सकता क्योंकि बड़ी बहन और बड़े भाई का अपमान कुछ तो रंग दिखाएगा ही। रामविलास पासवान के निधन के बाद लोकजनशक्ति पार्टी में क्या हुआ, सबने देखा है।

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