Wednesday 5th of February 2025 04:50:09 AM
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लोजपा के प्रदेश महासचिव ने राज्य सरकार के कार्यशैली पर खड़ा किया सवालिया निशान

जमशेदपुर: लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश महासचिव बंटी उपाध्याय ने राज्य सरकार के कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा किया है। जहां उन्होंने बताया कि आखिर किन कारणों से जमशेदपुर वन विभाग की पूर्व डीएफओ ममता प्रियदर्शी को हेमंत सरकार के शासनकाल में 4 वर्षों के दौरान तबादला नही किया गया था और इसके विपरीत कोल्हान के विभिन्न जिले के उपायुक्त, वरीय पुलिस अधीक्षक सहित अन्य विभाग के वरीय अधिकारी का अनेको बार तबादला किया गया था। लेकिन चम्पई सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद इन्होंने कोल्हान की डीएफओ को पदोन्नति देते हुए उनका तबादला हजारीबाग कर दिया लेकिन अब फिर से कयास लगाई जा रहीं हैं की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सत्ता में आने के साथ ही ममता प्रियदर्शी को पुनः कोल्हान में वापसी हो सकती है। उधर उन्होंने कहा जमशेदपुर फॉरेस्ट डिविजन में ममता प्रियदर्शी की पदस्थापित वर्ष 2020 में की गई थी इसके बाद लगभग 4 वर्षों तक इन्होंने कोल्हान में अपना योगदान दिया, इनका कार्यकाल अनेकों विवाद से घिरा रहा जिसमें मुख्य रूप से वन क्षेत्र में कई हाथियों की दुर्घटनाओं से मौत और उसमें प्रमुखता से मुसाबनी में हुए हादसे में पांच हाथियों की मौत सुर्खियों में रहा। लेकिन हद तो तब हो गई जब इतने बड़े घटना होने के बावजूद डीएफओ द्वारा किसी वन रक्षी, वनपाल एवं वन क्षेत्र पदाधिकारी पर किसी तरह का कोई भी कार्रवाई नहीं किया गया। यहां तक की प्रभारी वनपाल बनाने में भी इनके द्वारा गलत तरीका अपनाया गया क्योंकि ममता प्रियदर्शी प्रभारी वन संरक्षक भी थी। इस दौरान उन्होंने 21 बीट में मात्र 8 प्रभारी वनपाल बनाएं जिसमें सारे नियमों को दरकिनार कर दिया गया। इतने सारे घटना और कई विवादित निर्णय के बावजूद इनके ऊपर किसी प्रकार का कोई जांच नहीं हुआ जो कहीं ना कहीं उच्च अधिकारियों की मिलीभगत को दर्शाता है। जमशेदपुर वन क्षेत्र के कर्मचारियों ने नाम गुप्त रखने के शर्त पर बताया डीएफओ ममता प्रियदर्शी की कृपा कुछ वनरक्षियों वनपाल पर विशेष रही है और उनका पदस्थापना विशेष जगहों पर लकड़ी खनन माफियाओं के इशारे पर किया गया। उन्होंने बताया कि उनके चार वर्षो के कार्यकाल के दौरान वनरक्षीयों का कई बार स्थानांतरण किया गया लेकिन वैसे लोग जिन पर माफिया का हाथ था वह अपने जगह पर जस के तस बने रहे। अभी स्थानांतरण के बाद भी लोकहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण का हवाला देते हुए इनके द्वारा भेदभावपूर्ण तरीके से वन रक्षी/वनपाल का स्थानांतरण एवं पदस्थापन किया गया ।अब देखना यह होगा कि इस राज्य की सरकार को नौकरशाह चला रहे हैं या जनप्रतिनिधि ? अगर पुनः ममता प्रियदर्शी की कोल्हान वापसी होता है तो हम इसकी लिखित शिकायत महामहिम राज्यपाल और केंद्रीय वन मंत्री को करेंगे।

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