सरायकेला: 14 जून, कुकड़ू नक्सली घटना, तीन साल विशेष

 

पांच पुलिसकर्मी हुए थे शहीद, आज भी उस ख़ौफ़नाक मंजर को याद कर सहम जाते है लोग

   गुलाम रब्बानी
सरायकेला: आज 14 जून है। आज ही के दिन तीन वर्ष पूर्व 14 जून 2019 को सरायकेला-खरसावां जिला के तिरुलडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत कुकड़ू सफ्ताहिक हाट बाजार में नक्सलियों ने कायरता पूर्ण रवैया अपनाते हुए तिरुलडीह थाना के पांच जवानों पर पीछे से वार कर बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। ये घटना उस वक्त घटी थी जब पुलिसकर्मी, गस्ती से लौटने के बाद हाट के पास एक दुकान पर शाम के वक्त कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे, तभी पहले से घात लगाये बैठे नक्सलियों ने तबातोड़ हमला कर पांच पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या कर उनके हथियार लूट ले गए थे। नक्सलियों ने पहले जवानों पर भुजाली से हमला किया था, फिर पुलिसकर्मियों के ही हथियार लूट कर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस घटना में तिरुलडीह थाना का ड्राइवर सुखलाल कुदादा ने जंगल में भागकर अपनी जान बचाई थी और देर रात तिरुलडीह थाना आये थे।

ये पुलिसकर्मी हुए थे शहीद

एएसआइ गोवर्धन पासवान,एएसआइ मनोधन हांसदा, आरक्षी धनेश्वर महतो,आरक्षी डिब्रू पूर्ति और आरक्षी युधिष्ठिर मलुवा।

घटनास्थल के समीप का दुकान आजतक है बंद

कुकड़ू हाट के समीप पुलिस के जवान कॉल ड्रिंक पी रहे थे। इसी बीच अचानक धावा बोल कर नक्सलियों ने पुलिस जवानों पर हमला कर दिया और मौत के घाट उतार कर सभी हथियार छीनकर ले गए। वही घटनास्थल की कॉल ड्रिंक दुकान आजतक बंद ही है। उक्त दुकान को बंद कर दूकानदार ने अन्य जगह पर दुकान शिफ्ट कर लिया है। वही कुकड़ू हाट में हुई नक्सली घटना के बाद से क्षेत्र के लोगो मे भय का माहौल बना हुआ है। जहां आज भी शाम 06 बजे के बाद तिरुलडीह-कुकड़ू सड़क में लोगो की आवाजाही नही के बराबर होती है। इक्के-दुक्के वाहन ही रात को पार होती है।

घटनास्थल से 500 मीटर की दूरी पर है थाना भवन, नही शुरू हुआ संचालन

जिस जगह यह घटना हुई थी, वहां से 500 मीटर की दूरी पर वर्ष 2016 से ही कुकडू थाना भवन बनकर तैयार है। लेकिन आजतक उस थाना भवन का संचालन शुरू नही हुआ है। झारखंड के तत्कालीन डिप्टी सीएम और ईचागढ़ के विधायक सुधीर महतो ने कुकड़ू प्रखंड में एक थाना भवन की आवश्यकता को देखते हुए प्रस्ताव लाया था। वहीं 2014 में तिरुलडीह थाना का दबाव कम करने के लिए कुकड़ू थाना के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। जिसे रघुवर सरकार ने काम को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2016 में थाना भवन निर्माण कार्य पूरा करवा दिया था, लेकिन फिर सरकार ने उदासीन रवैया अपनाया और थाना भवन का संचालन शुरू नही हुआ। इस भवन की लागत करीब एक करोड़ रुपए आई। वहीं आज भी स्थानीय लोग थाना भवन संचालन की मांग उठा रहे हैं।

क्यों जरूरी है कुकड़ू थाना का संचालन

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कुकड़ू प्रखंड की आबादी 52 हजार 973 है, लेकिन वर्तमान में यहां की आबादी बढ़कर लगभग 65 हजार को पार कर चुकी है। बावजूद इसके यहां थाना भवन का संचालन शुरू नही हुआ। यह क्षेत्र तिरुलडीह थाना अंतर्गत पड़ता है, जो कि यहां से 06 किलोमीटर दूर है। वही दूसरा थाना नीमडीह है, यह भी कुकड़ू प्रखंड से करीब 34 किलोमीटर दूर है। अगर कोई अप्रिय घटना या नक्सली हमला इस क्षेत्र में होता है तो लोगों को प्रशासनिक सुरक्षा नही मिल पाती है। कुकड़ू प्रखंड कार्यालय के समीप करोडों की लागत से थाना भवन भी बना है। लेकिन यह थाना वर्त्तमान में शोभा की वस्तु बनकर रह गयी है, जो हाथी का दांत साबित हो रहा है। इधर कुछ दिनों से अपराधी छिनतई, गोली चालन एवं लूट की घटना को अंजाम दे रहे है।

घटना की हुई एनआईए जांच, ये निकली रिपोर्ट में

इस घटना की जांच का जिम्मा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को दिया गया था। जहां एनआइए ने केस को 13 दिसंबर 2020 को टेकओवर करते हुए एनआइए की विशेष अदालत ने 18 नक्सलियों पर आरोप पत्र दाखिल था। इस मामले में अबतक दर्जन भर नक्सली गिरफ्तार हुए है। वही घटना का मास्टरमाइंड पीएलएफआई के हार्डकोर नक्सली महाराज प्रामाणिक ने झारखंड पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है। लेकिन, पुलिस प्रशासन अबतक जवानों से लुटे हथियार को बरामद नही कर पायी है। एनआइए के जांच के अनुसार कुकड़ू सफ्ताहिक हाट में पुलिसकर्मियों पर हमले की योजना सेंट्रल कमेटी सदस्य अनल दा के नेतृत्व में हमले के एक माह पहले बनाई गई थी। इस घटना के एक दिन पहले अरहंजा जंगल में अंतिम रूप दिया गया था। जहां नक्सलियों ने हमले का पूर्वाभ्यास किया था। हमले के पीछे मूल उद्देश्य था हथियार लूटना और एक साथी नक्सली प्रदीप स्वांसी की हत्या का बदला लेना था।

कुकडू घटना के बाद चार एसपी नही शुरू करा पाए थाना का संचालन

कुकडू नक्सली घटना के समय सरायकेला-खरसावां में चंदन कुमार सिंहा एसपी थे, जिस दिन यह घटना हुआ उस दिन तत्कालीन एसपी चंदन कुमार सिंहा छुट्टी पर थे, घटना के बाद पूर्वी सिंहभूम के तत्कालीन एसपी प्रभात कुमार और कोल्हान के तत्कालीन डीआईजी कुलदीप द्विवेदी रात के करीब 09 बजे घटनास्थल पर पहुंचे थे और शहीद पुलिसकर्मियों के शवों को घटनास्थल से उठाकर पोस्टमार्टम के लिए ले गए थे। घटना के कुछ दिनों के बाद चंदन कुमार सिंहा का सरायकेला जिला से तबादला हो गया, उनके बाद कार्तिक एस को सरायकेला का एसपी बनाया गया है, वही उनके बाद मोहम्मद अर्शी सरायकेला के एसपी बने, फिर उनका भी तबादला हुआ, और जमशेदपुर रेल एसपी आनंद प्रकाश को सरायकेला जिले का एसपी बनाया गया, जो वर्तमान में सरायकेला जिला में एसपी के रूप में पदस्थापित है। कुकडू नक्सली घटना के बाद इन चारों एसपी ने कुकडू थाना का संचालन शुरू कराने को लेकर गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर थाना को शुरू करवाने प्रयास किए, लेकिन सभी असफल हुए। बताया जाता कि जिस जगह पर कुकडू थाना का भवन बना है, वो जगह पुलिस विभाग के दृष्टिकोण से सही जगह पर नही है, जिसके कारण संचालन शुरू नही हो पा रहा है। हालाकिं पिछले विधानसभा सत्र में वर्तमान ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने कुकडू थाना के संचालन को लेकर सरकार का ध्यानाकृष्ट कराया था। लेकिन अबतक इसपर कोई पहल होते हुए नही दिखा। न ही कुछ सुगबुगाहट है।

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