बिहार के कहलगांव और बंगाल के फरक्का एनटीपीसी के पास मात्र 24 घंटे का काेयला

बिजली उत्पादन पर पड़ेगा गहरा असर
बिजली उत्पादन पर पड़ेगा गहरा असर
संथाल ब्यूरो/नीरज कुमार जैन
कहलगांव व फरक्का में मात्र एक दिन का कोयला बचा है। जानकारी रहे कि झारखंड की राजमहल कोल परियोजना में प्रत्येक दिन करीब 60 हजार टन कोयले का उत्पादन होता था, जो अब घटकर महज 10 हजार टन रह गया है। गोड्डा ईसीएल खदान क्षेत्र से प्रतिदिन करीब 60 हजार टन की जगह मात्र 10 हजार टन कोयले का ही उत्पादन हो पा रहा है।
देश के दो बड़े ताप विधुत उत्पादन केंद्र एनटीपीसी में शामिल कहलगांव और फरक्का के पास अब मात्र एक दिन का ही कोयला बचा है। ईसीएल की राजमहल कोल परियोजना, ललमटिया से वर्तमान में 10 रैक की जगह महज चार रैक कोयले की आपूर्ति ही हो पा रही है। इसी के तहत तीन रैक कहलगांव तथा एक रैक कोयला फरक्का को आपूर्ति की वजह से दोनों ताप विधुत उत्पादन केंद्र  के पास कोयले का अभाव झलकने लगा है। परियोजना के मुताबिक, कोयले के उत्पादन में कमी का असर पूरी तरह से दोनों ताप विद्युत परियोजना को पड़ने वाली है।
जानकारी रहे कि राजमहल कोल परियोजना में लगातार दो साल से जमीन के कारण कोयले का उत्पादन कम हो रहा है। गोड्डा के तालझारी गांव में जमीन अधिग्रहण के बावजूद ग्रामीणों के विरोध के कारण खनन कार्य शुरू नहीं कर पाया है।जमीन की कमी के कारण राजमहल कोल परियोजना में अभी कोयले का उत्पादन घटकर मात्र 10 हजार टन प्रतिदिन रह गया है। यही वजह है कि कहलगांव व फरक्का एनटीपीसी को 10 से 12 हजार टन कोयले की आपूर्ति प्रतिदिन ही हो पा रही है।
दोनों पावर प्लांट की स्थिति खराब
कोयले की आपूर्ति कम होने की वजह से दोनों ताप विद्युत परियोजना की स्थिति बेहद खराब हो गयी है। राजमहल परियोजना में हेड क्वार्टर के निदेशक व टेक्निकल पल पल की सूचना ले नजर बनाए हुए हैं। जमीन संकट से उबरने के लिए प्रयास किया जा रहा है। परियोजना के महाप्रबंधक प्रभारी देवेंद्र कुमार नायक परियोजना के अन्य पदाधिकारियों से जमीन समस्या से उबरने को मुश्तैद व तत्पर है।

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