झारखंड सरकार की नई शराब नीति को हाईकोर्ट में चुनौती

उपभोक्ताओं को महंगी मिलेगी शराब?
उपभोक्ताओं को महंगी मिलेगी शराब?

रांची । राज्य के नई उत्पाद नीति के खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। प्रार्थी तारकेश्वर महतो की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज और विकल्प गुप्ता द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि जब झारखंड स्टेट बेवरेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) पूरे राज्य का स्टाकिस्ट है और उसे खुदरा बिक्रा का भी लाइसेंस दिया गया है तो इसके बीच में किसी दूसरे कंपनी को लाने का कोई औचित्य नहीं है। शराब बिक्री में आम तौर पर दो सौ से एक हजार प्रति कार्टन छूट मिलती है। यदि जेएसबीसीएल को थोक बिक्री का लाइसेंस होता तो इस छूट का लाभ राज्य सरकार अथवा उपभोक्ताओं को होता।

निजी कंपनियों को मिलेगा इसका लाभ

थोक विक्रेता कंपनी को बीच में रखने की वजह से उक्त राशि का लाभ निजी कंपनियों को मिलेगा। यहीं इस नीति का उद्देश्य है। 28 मार्च 2022 को वर्ष 2018 के कानून में संशोधन किए जाने के लिए राज्यपाल के आदेश से अधिसूचना जारी की गई। 28 मार्च या उससे पूर्व ऐसा कोई प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष नहीं ला गया था। 30 मार्च 2022 को कैबिनेट के सामने एक प्रस्ताव लाया गया, जिस पर बोर्ड आफ एवेन्यू ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। उसमें भ्रामक सूचना दी गई है कि पूर्व के कानून में संशोधन करके व्यापारियों को एक माह का अवधि विस्तार दिया जा चुका है। वास्तव में उससे पूर्व ऐसा कोई प्रस्ताव कैबिनेट से पारित नहीं हुआ था तो 30 मार्च को दी गई सूचना भ्रामक ही कही जाएगी।

सरकार ने आम सूचना जारी कर सुझाव क्यों नहीं मांगा

यदि राज्य सरकार को 28 मार्च 2022 या उससे पूर्व ही इस विषय का भान था कि उत्पाद नीति बदली जाएगी और बदली उत्पाद नीति को अप्रैल माह में लागू किया जाएगा तो एक्साइज एक्ट धारा 89 (3) के प्रविधान के तहत पूर्व में आम सूचना देकर और आपत्तियों का निराकरण करने पर ही नीति बनाई जाएगी। इस नियम का भी उल्लंघन किया गया है।

जेएसबीसीएल को स्टाक का लाइसेंस देकर और जेएसबीएल द्वारा खुदरा बिक्री की धारणा रखकर या खुदरा बिक्री का लाइसेंस देकर बीच में कपनी खड़ी की जा रही है, जिसका लाभ गलत तरीके से लिया जा सकेगा। इसके अलावा नई उत्पाद नीति में एक्साइज एक्ट के विभिन्न प्रविधानों का उल्लंघन किया है। एक्साइज एक्ट की धारा 90 के तहत किसी प्रकार की नियमावली बनाने के अधिकार सिर्फ बोर्ड आफ रेवेन्यू को है, ऐसा करने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। जिसका उल्लंघन किया गया है।

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