झारखंड राजद के प्रदेश अध्यक्ष से खफा हैं लालू यादव?

क्या राजद के अंदर अभय सिंह को हटाने की मुहिम जोर पकड़ रही है?
क्या राजद के अंदर अभय सिंह को हटाने की मुहिम जोर पकड़ रही है?

लालू प्रसाद यादव झारखंड राजद के प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह से नाराज़ बताए जाते हैं। उनकी नाराज़गी की कोई एक वजह नहीं बल्कि कई वजह हैं। पहला, गठबंधन को लेकर अभय सिंह की बयानबाज़ी, दूसरा, लालू प्रसाद यादव के करीबियों पर कार्रवाई और तीसरा, अभय सिंह की कार्यशैली के खिलाफ संगठन में बढ़ता असंतोष।

अभय सिंह की बयानबाज़ी से महागठबंधन के नेता आहत

हाल के दिनों में राजद के प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह ने महागठबंधन को लेकर कुछ ऐसी बयानबाज़ी की, जिससे कांग्रेस और झामुमो दोनों नाराज़ दिखे । अभय सिंह और रामेश्वर उरावं के बीच एक-दूसरे की “औकात” वाली बयानबाज़ी का अच्छा संदेश नहीं गया। कांग्रेस और झामुमो के शीर्ष नेताओं ने अभय सिंह की शिकायत राजद आलाकमान से भी की । बाद में तेजस्वी यादव को खुद बयान देना पड़ा की राजद हर हाल में महागठबंधन के साथ है ।

लालू यादव के करीबियों के निष्कासन से बिगड़ी बात

15 नवंबर को प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह  के द्वारा 4 राजद नेताओं पार्टी के प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार, मनोज पांडेय, अनिल यादव और विनोद यादव को छह साल के लिए  पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। राजद से निष्कासित नेता विनोद सिंह यादव का आरोप है कि राजद में रहते हुए नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगाने वालों को संरक्षण और लालू – राबड़ी को भगवान की तरह पूजने वाले का निष्कासन हो रहा है ।

बात लालू यादव तक पहुंची तो 15 नवंबर को ही देर शाम प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार का निष्कासत रद्द कर दिया गया । लेकिन अभय सिंह लालू प्रसाद यादव के गुड बुक से निकल चुके हैं।

दरअसल राजद प्रदेश अध्यक्ष के द्वारा जारी इस पत्र में प्रदेश प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार का नाम भी दर्ज है । हालांकि पत्र जारी होने के महज कुछ घंटे बाद भी लालू यादव के द्वारा प्रदेश अध्यक्ष को फटकार लगाने की बात सामने आई है । राजद के प्रधान महासचिव संजय यादव ने प्रदेश प्रवक्ता को पद पर बने रहने की सूचना दी है । यानी डॉ मनोज कुमार का निष्कासन रद्द करने का आदेश प्रदेश अध्यक्ष को दिया गया है ।

झारखंड राजद संगठन के अंदर अभय सिंह की कार्यशैली को लेकर असंतोष 

राजद के कई नेता नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि अभय सिंह की दबंगई और उनके काम करने का तरीका ठीक नहीं है। उनमें व्यवहारकुशलता की कमी है। वे राजनीतिक कार्यकर्ताओं से ऐसे बात करते हैं मानो उनके मातहत काम करने वाले कर्मचारी हों । इसके अलावा एक शिकायत यह भी है कि वे अपने खास आदमियों से घिरे रहते हैं और अपने खिलाफ सही बात भी सुनना उनको बर्दाश्त नहीं। राजद कार्यकर्ताओं की यह भी शिकायत है कि ऐसा लगता ही नहीं है कि राजद सत्ता में है। इस सरकार में राजद कार्यकर्ताओं की पैरवी नहीं सुनी जाती ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP Twitter Auto Publish Powered By : XYZScripts.com