अवैध खनन और ईंट भट्टों की चिमनियों से निकलता जहरीला धुआं, ऐसे कैसे साफ होगी गंगा ?

राजमहल पहाड़ी श्रृंखलाओं के तट से गुजरी झारखंड की एकमात्र गंगा मे प्रदूषण
राजमहल पहाड़ी श्रृंखलाओं के तट से गुजरी झारखंड की एकमात्र गंगा मे प्रदूषण

संथाल ब्यूरो/ उज्ज्वल दुनिया

साहिबगंज। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से नमामि गंगे योजना के तहत प्रदूषण मापक यंत्र लगाया गया लेकिन उनकी सूध लेने वाला कोई नहीं। सूत्रो की माने तो उक्त यंत्र लगने के कुछ ही दिनों मे गायब हो गया है। जबकि यंत्र से प्रदूषण का आंकड़ा एकत्रित किया जाता और आकड़े के तहत ही नदी को प्रदूषण से मुक्त रखने की रणनीति बनती। इसके पूर्व पत्थर क्रेशर व ट्रकों के परिचालन से दूषित वायु को मापने के लिए भी चयनित स्थलों पर एआईक्यू के लिए यंत्र लगने थे। इसके लिए क्रेशर संचालको से राशि भी ली गई थी। लेकिन प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों की अकर्मण्यता के कारण उक्त एआईक्यू मापक यंत्र पंजी मे ही सिमट कर रह गया ।

झारखण्ड में नमामि गंगे परियोजना का बुरा हाल
झारखण्ड में नमामि गंगे परियोजना का बुरा हाल

प्रदूषित होती झारखंड मे राजमहल की पहाड़ी श्रृखलाओं के तट से गुजरी गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए केंद्र सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत करोड़ों की योजनाओं का संचालन कर रखा है। उसी कड़ी मे ही शहर का अपशिष्ट पदार्थ हो या राजमहल पहाडिय़ों से पत्थर खनन व क्रेशर संचालन से उत्पन्न होने वाला अपशिष्ट पदार्थ हो या शहर से निकलने वाले नाला- नाली नदी में प्रवाहित न हो। इसके लिए सीवरेज सिस्टम प्रोजेक्ट मंथर गति से संचालित है। साहिबगंज जिला अंतर्गत करीब 183 कि.मी. गंगा नदी का क्षेत्र आता है। जिसमें करीब दो दर्जन प्रमुख घाट है। वहीं साहिबगंज, राजमहल गंगा के  लगभग 14 घाट है और इनमे दो शमशान घाट भी है जिनका सौंदर्यकरण के साथ ही जीर्णोद्धार भी करवाया जा रहा है।

15 दिनों मे आंकड़ा संग्रह के बाद रांची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रेषित

नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी के जल की गुणवत्ता मापने के लिए गंगा नदी में प्रदूषण मापक सोलर यंत्र दुमका प्रदूषण बोर्ड की ओर से साहिबगंज और राजमहल गंगा के चयनित घाट पर लगवाया था। यंत्र से हर 15 दिन पर पानी की जांच कर रिपोर्ट दुमका स्थित प्रदूषण बोर्ड कार्यालय के द्वारा रांची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रेषित किया जाना था। लगातार रिपोर्ट से जांच कर नदी मे कितना प्रदूषण हैं। इसकी गुणवत्ता की माप के बाद गंगा नदी को प्रदूषण से मुक्त रखने के उपाय किए जाने थे, पर इसमें संबंधित बोर्ड के अधिकारी कितने सजग है यह जिला के जल स्त्रोतों, गंगा नदी तट, एनएच व मुख्य पथो के किनारे पत्थर चिप्स भंडारण से लेकर सरेआम स्वयं बयां कर रहा है।

ईट भट्ठों की चिमनियों से निकलते जहरीले धूंआ और क्रशर प्लांट ने गंगा को प्रदूषित कर रखा है
भट्ठों की चिमनियों से निकलते जहरीले धूंआ और क्रशर प्लांट ने गंगा को प्रदूषित कर रखा है

गंगा के तट के गांवों जागरूकता 

गंगा किनारे बसे 78 गांव में विशेष अभियान चला लोगों को जागरूक कर गंगा की महिमा के बारे में बताने की आवश्यकता है। गंगा में मृत मवेशी, साबुन का प्रयोग न करने के साथ गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जागरूकता अभियान के तहत प्रेरित किया जा सकता है। आरओ केके पाठक से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन मोबाइल पर कईबार रिंग होने के बाद भी रिसीव नही किए जाने से उनका वर्जन नहीं दिया जा सका।

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