IAS इरा सिंघल का नाम आज देशभर में प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। उन्होंने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद न केवल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में चार बार सफलता प्राप्त की, बल्कि 2014 में ऑल इंडिया पहली रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।
दिव्यांगता को बनाया ताकत
मेरठ की रहने वाली इरा सिंघल स्कोलियोसिस (Scoliosis) नामक रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारी से पीड़ित हैं, जिससे उनके हाथों की गति बाधित होती है। लेकिन उनकी इच्छाशक्ति इतनी मजबूत थी कि उन्होंने किसी भी तरह की शारीरिक बाधाओं को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
मजाक उड़ाने वालों को दिया करारा जवाब
बचपन से ही जब इरा ने अपने दोस्तों से कहा कि वह IAS बनना चाहती हैं, तो कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। उन्हें ‘कुबड़ी’ कहकर चिढ़ाया जाता था और लोग कहते थे, “जो खुद चल नहीं सकती, वह अफसर कैसे बनेगी?” मगर इरा ने इन तानों को अपनी प्रेरणा बना लिया।
शिक्षा और करियर की शुरुआत
इरा सिंघल ने दिल्ली के नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NSIT) से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया और फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (FMS) से MBA की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एक कन्फेक्शनरी कंपनी में स्ट्रैटेजी मैनेजर के रूप में काम किया।
चार बार UPSC पास, लेकिन संघर्ष जारी
इरा ने 2010, 2011 और 2013 में UPSC परीक्षा पास कर IRS (Indian Revenue Service) में चयन पाया, लेकिन 62% लोकोमोटर विकलांगता के कारण उन्हें पोस्टिंग नहीं दी गई।
उन्होंने हार नहीं मानी और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में केस दायर किया। 2014 में उन्होंने यह केस जीता और जब उसी साल उन्होंने UPSC परीक्षा में AIR-1 हासिल किया, तो पूरे देश ने उनकी सफलता को सलाम किया।
नारीशक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक
इरा सिंघल की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि दृढ़ निश्चय और मेहनत से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। आज वे IAS अधिकारी होने के साथ-साथ दिव्यांगजनों के अधिकारों की आवाज भी बन चुकी हैं।
👉 उनका संदेश: “अगर लोग आपकी काबिलियत पर सवाल उठाएं, तो उन्हें अपनी सफलता से जवाब दें!”