कभी डायन-बिसाही से कलंकित पद्मश्री छुटनी देवी आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों अलंकृत


उज्जवल दुनिया संवाददाता/ अजय निराला

हजारीबाग। झारखंड में डायन-बिसाही के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली छुटनी देवी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को पद्मश्री से अलंकृत किया। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड की रहने वाली छुटनी देवी को वर्ष 2021 के लिए पद्मश्री से नवाजा गया।

सोमवार को झारखंड के प्रसिद्ध लोकगायक मधु मंसूरी हंसमुख और छऊ गुरु शशधर आचार्य को वर्ष 2020 के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

झारखंड के प्रसिद्ध नागपुरी गीतकार व गायक मधु मंसूरी हंसमुख और छऊ नृत्य के गुरु शशधर आचार्य को वर्ष 2020 के लिए सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया। मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने झारखंड में डायन-बिसाही के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली छुटनी देवी को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।

इस तरह झारखंड में पद्मभूषण, पद्म विभूषण और पद्मश्री अवार्ड पाने वालों की कुल संख्या 216 हो गई है। छुटनी देवी झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत गम्हरिया प्रखंड की बीरबांस पंचायत स्थित भोलाडीह गांव की रहने वाली हैं। महज 12 साल की उम्र में उनकी शादी गम्हरिया थाना अंतर्गत सामरम पंचायत (वर्तमान में नवागढ़) निवासी धनंजय महतो (अभी मृत) से हुई थी। वर्ष 1995 में पड़ोसी की बेटी बीमार हो गई थी।

ग्रामीणों को शक हुआ था कि छुटनी ने कोई जादू- टोनाकर उसे बीमार कर दिया है। उसके बाद गांव में पंचायत हुई, जिसमें उन्हें डायन करार देते हुए घर में घुसकर उनके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की गई थी। छुटनी देवी को ग्रामीणों ने इस दौरान प्रताड़ित करते हुए मल-मूत्र तक पिलाया था। ग्रामीणों की इस प्रताड़ना से तंग आकर छुटनी देवी मायके चली आयी थीं।

इसके बाद से छुटनी देवी डायन-बिसाही की रोकथाम को लेकर लगातार आवाज उठाती रहीं। इसके बाद एसोसिएशन फॉर सोशल एंड ह्यूमन अवेयरनेस (आशा) से जुड़कर डायन-बिसाही के खिलाफ आवाज उठाने लगीं। आशा के सौजन्य से बीरबांस में पुनर्वास केंद्र का संचालन कर रही हैं। छुटनी देवी सरायकेला जिला इकाई की बतौर निदेशक के तौर पर कार्यरत हैं।

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