हेमंत सोरेन खनन पट्टा मामलाः जानिए क्या कहता है संविधान और कानून ?

हेमंत सोरेन खनन पट्टे पर क्या कहता है कानून ?
हेमंत सोरेन खनन पट्टे पर क्या कहता है कानून ?

रांची । राज्यपाल को भेजे अपने शिकायती पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने नाम पर पत्थर का माइनिंग लीज लिया है । ऐसे में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए ।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2)

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (2) कहती है कि अगर कोई जनप्रतिनिधि अपने या किसी ऐसे व्यक्ति जो उससे प्रत्यक्ष या अपरोक्ष रुप से जुड़ा हो, अपने किसी फैसले से उसे प्रत्यक्ष या अपरोक्ष रूप से फायदा पहुंचाता हो तो…

कोई लोक सेवक जो आपरािधक अवचार करेगा इतनी अविध के लिए, जो 1 [चार वर्ष] से कम की न होगीकिंतु जो 1
[दस वर्ष] तक की हो सकेगी, कारावास से दडनीय होगा और जुमार्ने का भी दायी होगा ।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मंत्रियों के लिए जारी आचार संहिता

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मंत्रियों के लिए जारी आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) में निहित प्रावधानों के अनुसार किसी व्यक्ति के मंत्री या मुख्यमंत्री बनने के बाद दो माह के अंदर उसे खुद को अपनी पुरानी व्यावसायिक गतिविधियों से अलग कर लेना है ।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9ए

रघुवर दास का आरोप है कि सीएम का माइनिंग लीज लेना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9ए के दायरे में है । प्रावधानों के तहत किसी सदस्य द्वारा सरकार के साथ व्यापारिक गतिविधियों के लिए करार करने पर उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है ।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9 ए कहती है कि वह व्यक्ति, जो भारत सरकार केअधीन या कसी राज्य के
सरकार केअधीन पद धारण करते हुए भ्रष्टाचार के कारण या राज्य के प्रति अभिक्त केकारण पदच्युत किया गया है, ऐसी पदच्युित की
तारीख से पांच वर्ष की कालाविध के लिए निरर्हित होगा ।

2 (1) कोई भी व्यक्ति निरर्हित होगा यदि और जब तक कोई ऐसी संविदा विद्यमान है, जो उसने समुचित सरकार के साथ अपने व्यापार या कारबार के अनुक्रम में उस सरकार को माल का प्रदाय करने के लिए या उस सरकार द्वारा उपक्रांत किन्ही संकर्मों के निष्पादन के लिए की है ।

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां कि कोई संविदा उस व्यक्ति द्वारा, जिसके द्वारा वह समुचित सरकार के साथ की गई थी, पूर्णतया निष्पादित कर दी गई है, वहां उस संविदा के बारे में केवल इस तथ्य के कारण कि सरकार ने उस संविदा के अपने भाग का पूर्णतः या भागतः पालन नहीं किया है यह नहीं समझा जाएगा कि वह विद्यमान है ।

हेमंत या बसंत सोरेन फंसेंगे या जाएंगे ?

सारा दारोमदार मुख्य सचिव द्वारा भेजी गई सर्टिफाइड दस्तावेजों पर निर्भर करेगा । अगर दस्तावेजों द्वारा प्रमाणित हो जाता है कि मुख्यमंत्री ने पद की शपथ लेने से पहले ही अनगड़ा पत्थर खदान के आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, और सत्ता में आने के बाद उन्हे लीज नहीं मिली तो उनके लिए बचाव के रास्ते खुले हैं। इसी तरह बसंत सोरेन को भी ये साबित करना होगा कि महागठबंधन सरकार बनने के पहले ही उन्हे माइनिंग लीज मिली थी और सरकार में आने के बाद उन्हे किसी तरह का फायदा नहीं मिला, तब ही वे बच सकते हैं।

पंकज मिश्रा मामले पर फंस सकता है पेंच

साहिबगंज के जिला खनन कार्यालय द्वारा जारी अनुमति पत्र की माने तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा ने हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के उपरान्त (04 जनवरी 2021) को जिले के मंडरो अंचल के गिलवारी मौजा ( ग्राम- गिलवारी) में 6.25 एकड़ जमीन पर खनन पट्टे के लिए आवेदन दिया था। उनके महाकाल स्टोन वर्क्स को 13 मार्च 2021 को खनन पट्टे की अनुमति प्रदान की गई । ये अनुमति तब मिली जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास खनन एवं पर्यावरण विभाग था। अब कानूनन पंकज मिश्रा को ये साबित करना है कि उन्होने खनन पट्टा हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री के किसी प्रभाव का इस्तेमाल नहीं किया ।

सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा  को मिली अनुमति का सरकारी पत्र
सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को मिली अनुमति का सरकारी पत्र

 

 

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