प्राकृतिक आपदा से किसानों को बचाने के लिए हेमंत सरकार ने शुरू की ‘झारखंड फसल राहत योजना’

 

पहले साल इस योजना पर खर्च होंगे 100 करोड़ रुपये
पहले साल इस योजना पर खर्च होंगे 100 करोड़ रुपये

रांची। झारखंड सरकार ने किसान हित में एक बड़ी योजना का शुभारंभ किया है. मौसम की मार से पीड़ित किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा से हेमंत सोरेन की नेतृत्व वाली झारखंड सरकार ने राज्य में ‘झारखंड फसल राहत योजना’ की शुरुआत की है. झारखंड सरकार ने इस योजना की शुरुआत केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल राहत योजना के स्थान पर की है. इस योजना के तहत राज्य सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले फसल के नुकसान से बचाने के लिए बीमा का प्रावधान किया है.

इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ने सूखा पड़ना, ओले पड़ना आदि प्राकृतिक आपदाओं को शामिल किया है. इस योजना के लिए झारखंड सरकार ने 100 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है. झारखंड फसल राहत योजना का फायदा उठाने के लिए सबसे पहले इस योजना के अंतर्गत आवेदन करना होगा. सरकार ने इस योजना का आरंभ करते हुए यह उम्मीद जताई कि यह योजना आने वाले समय में राज्य के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा नुकसान नहीं होगा और वे इस योजना की सहायता से आत्मनिर्भर बनने में सक्षम होंगे.

झारखंड फसल राहत योजना के साथ ही राज्य की हेमंत सरकार ने किसानों की कर्ज़माफी का भी ऐलान किया है. इस कर्ज़माफी योजना के लिए सरकार ने दो हजार करोड़ रुपए का एक अलग से बजट का ऐलान किया है. इस योजना का किसानों तक लाभ पहुंचाने के लिए जल्द ही सरकार एक पोर्टल लॉन्च करने वाली है. इस पोर्टल के माध्यम से सभी किसानों का डाटा एकत्रित किया जाएगा. इसके लिए प्रशासन ने सभी बैंको से कर्ज़ लिए हुए किसानों के आधार को इनेबल करने का निर्देश दिया है. इस संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल 12 लाख लोन अकाउंट में से अब तक 6 लाख लोन अकाउंट के आधार इनेबल किए जा चुके हैं.
इस फसल योजना की विशेषताओं की बात करें तो इस योजना को ज़मीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने 100 करोड़ रुपए की बजट का ऐलान किया है. इस योजना के अंतर्गत नुकसान की राशि किसानों तक बीमा कंपनी द्वारा प्रदान की जाएगी और इसलिए सबसे पहले इक्छुक किसानों को इस योजना के अंतर्गत पंजीकरण कराना होगा. पंजीकरण के बाद झारखंड फसल राहत योजना के अंतर्गत पंजीकृत किसानों को एक तय प्रीमियम का भुगतान करना पड़ेगा. गौरतलब है कि इस योजना का लाभ केवल इस राज्य के स्थायी निवासी ही ले पाएंगे. इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार की एक और शर्त के अनुसार वह किसान ही इसका लाभ ले सकते हैं जो किसी अन्य बीमा योजना का लाभ नहीं ले रहें हैं.

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