वन भूमि पर निर्माणाधीन बजरंगबली मंदिर को वन विभाग द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद अब वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगा है।

तिसरी में मंदिर को तोड़ा वही गावां में वन भूमि पर बसा दिया पूरा गांव

पार घाघरा में 20 हेक्टेयर वनभूमि पर बस गया एक खास समुदाय का गांव, एग्रीमेंट पेपर पर होती है वनभूमि की खरीद-बिक्री

यहां वनभूमि को अतिक्रमण करने या खरीदने के लिए एक समुदाय विशेष का होना जरूरी

गावां / गिरिडीह

झारखंड के गिरिडीह जिले के तीसरी मुख्‍य मार्ग पर निर्माणाधीन हनुमानजी के मंदिर को ध्‍वस्‍त करने से स्‍थानीय लोगों का आक्रोश वन विभाग अधिकारियों के खिलाफ उत्पन्न हो गया है। इसे कतई बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा. बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण वन भूमि की जमीन पर किया जा रहा था. वन विभाग को जब इसकी जानकारी मिली तो मंदिर को जेसीबी मशीन से गिरवा दिया गया.
वन भूमि पर निर्माणाधीन बजरंगबली मंदिर को वन विभाग द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद अब वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगा है। वन विभाग पर पक्षपात करने का आरोप लग रहा है। लोगों का आरोप है कि वन विभाग की मिलीभगत से गावां के पिहरा के पार घाघरा में 20 हेक्टेयर वनभूमि का अतिक्रमण कर एक खास समुदाय का पूरा गांव बस गया है। परंतु वहां वन विभाग कार्रवाई करने से बचती रहती है और तिसरी में मामूली से जमीन पर निर्माणाधीन मंदिर को तोड़कर बहुसंख्यकों की आस्था पर चोट कर रही है। इतना ही नहीं तिसरी प्रखंड के घाघरा में एक निहायत गरीब दलित का भी वन विभाग ने मकान ध्वस्त कर उसे खुले आसमान में इस पुस की रात काटने को विवश कर दिया है। गावां रेंजर अनिल कुमार द्वारा किए जा रहे यह पक्षपात पूर्ण कार्रवाई का अब चौतरफा विरोध शुरू हो गया है।

क्या है पार घाघरा का मामला

गावां थाना क्षेत्र के पूर्वी पिहरा पंचायत स्थित पार घाघरा गांव में लगभग 20 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण कर वहां एक समुदाय के ही सैकड़ों लोगों ने पक्का निर्माण कर पूरा गांव बसा लिया है और वन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। यहां अब भी वनभूमि पर बेरोक-टोक अतिक्रमण चालू है।

वन भूमि पर लगभग पांच पक्का मकान निर्माणाधीन है, जिसकी एक-दो दिनों में छत की ढलाई है। इसके अलावा वहां उक्त अवैध ढंग से वन भूमि पर बस चुके गांव में स्थानीय मुखिया द्वारा बगैर वन विभाग से एनओसी लिए वहां पक्की सड़क, हैंडपंप, एसबीएम के तहत शौचालय आदि का निर्माण करवा गया है।

पार घाघरा में एग्रीमेंट पेपर पर वनभूमि की खरीद-बिक्री भी होती है। यहां लाखों में जमीन का सौदा होता है। परंतु शर्त यह है कि पार घाघरा में वनभूमि पर अतिक्रमण करनेवाला या फिर वनभूमि को एग्रीमेंट पेपर पर खरीदने वाला एक खास समुदाय का ही हो। यह सब वहां लंबे समय से हो रहा है।
इन सब बातों की जानकारी वन विभाग को है। परंतु वहां कोई कार्रवाई नहीं होती है। इससे लोगों में उबाल है और अब गावां में भी वन विभाग के पक्षपात पूर्ण रवैए के खिलाफ लोग एकजुट होकर हल्ला बोलने की रणनीति बना रहे हैं।
क्या कहते हैं गावां रेंजर
गावां रेंजर अनिल कुमार से जब गावां प्रखंड के पार घाघरा और तिसरी के थंभाचक में हनुमान मंदिर तोड़े जाने पर किए गए पक्षपात पर जब सवाल किया गया तो रेंजर ने कहा कि मंदिर ऑन रोड था इस कारण वहां कार्रवाई हुई है। गावां के पार घाघरा में कई लोगों पर एफआइआर हुई है। जब उनसे कहा गया कि पार घाघरा में सिर्फ एफआइआर कर छोड़ दिये तो थंभाचक में मंदिर तोड़ने की बजाय वहां भी एफआईआर क्यों नहीं की गयी। इस सवाल पर वे चुप हो गए और कहा कि पार घाघरा में बन चुके पक्के मकान को बीपीएलई एक्ट (बिहार पब्लिक लैंड इंक्रोचमेंट एक्ट) के तहत कार्रवाई होगी। इसके अलावा वहां एक दो दिनों में जाकर जांच करते हैं, अगर वन भूमि पर बगैर एनओसी के सरकारी पक्की सड़क बनी है, तो कार्यकारी एजेंसी पर वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करेगें।

Forest department pull down under construction lord hanuman temple

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