
झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में जिस तरह से भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को बाहर किया गया उससे कांग्रेस के कई विधायक इतितेफाक नहीं रखते, लेकिन पार्टी अनुशासन के नाम पर वो फिलहाल खामोश हैं। कांग्रेस नियुक्ति नियमावली के मसले सीएम हेमंत सोरेन से बात करना चाहती है लेकिन सीएम फिलहाल कांग्रेस को भाव देने के मूड में नहीं हैं . ऐसे में पार्टी असमंजस में है कि करें तो क्या करें। झारखण्ड कांग्रेस के प्रवक्ता भोजपुरी, मगही, मैथिलि, अंगिका के साथ-साथ हिंदी को भी हटाने का खुलकर बचाव नहीं कर पा रहे।
अगर कांग्रेस ने कुछ नहीं किया तो होगा बड़ा नुकसान
कांग्रेस का असली जनाधार उन ईलाकों में है जहां बड़े पैमाने पर मगही, मैतिली, भोजपुरी और अंगिका आदि भाषआएं बोली जाती हैं . नई नियुक्ति नियमावली बनाते वक्त सरकार ने झामुमो के वोटबैंक का तो ख्याल रखा लेकिन कांग्रेस के गौर-आदिवासी विधायकों के बारे में जरा भी नहीं सोचा । खासकर कोयलांचल और पलामू प्रमंडल में इसे लेकर युवाओं के बीच बड़े पैमाने पर असंतोष है।
कुछ विधायक दबी जुबान से कर रहे विरोध
कांग्रेस की महिला विधायक दीपिका पांडेय सिंह महागामा से जीत कर विधानसभा में पहुंची हैं. उनके विधानसभा में बड़े पैमाने पर अंगिका बोली जाती है। लेकिन झारखण्ड सरकार ने अंगिका को स्थानीय भाषआओं की लिस्ट में शामिल नहीं किया है । ऐसे में बड़े पैमाने पर अंगिका भाषी छात्र-छात्राओं को झारखण्ड चयन आयोग की परीक्षाओं को पास करने में परेशानी होगी।
इसी तरह कोयलांचल के बेरमो और झरिया से जीतकर आने वाले कांग्रेस विधायक जयमंगल सिंह और पूर्णिमा नीरज सिंह भी परेशान हैं। अगर वो झारखण्ड सरकार की नई नियुक्ति नियमावली का विरोध करें तो पार्टी के बागी कहलाएंगे और अगर विरोध नहीं करते हैं तो इनके वोटर इनसे नाराज हो जाएंगे ।

नमाज जैसे मुद्दे पर भी कांग्रेस को नुकसान
झारखण्ड में मुसलमान कांग्रेस का बड़ा वोटबैंक रहे हैं. लेकिन विधानसभा के अंदर नमाज रूम अलॉट करने पर सारी वाहवाही झामुमो के हिस्से में आ गई। झामुमो ने खुलकर विधानसभा के अंदर नमाज रूम का जिस तरह से समर्थन किया, उससे अल्पसंख्यक मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा झामुमो की तरफ शिफ्ट होने लगा है। ऐसे में कांग्रेस को बिना कुछ किए बड़े वोटबैंक से हाथ धोना पड़ा ।
मजबूर नहीं, महागठबंधन का मजबूत साथी बने कांग्रेस
पलामू प्रमंडल से कांग्रेस के दिग्गज नेता के एन त्रिपाठी ने खुलकर विधानसभा के अंदर नमाज रूम को असंवैधानिक बताया। अंदर ही अंदर कई नेता और विधायक उनकी बातों से सहमत हैं। राजधानी में कांग्रेस के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कांग्रेस को अपनी हिंदू विरोधी छवि से बाहर निकलना ही होगा। हमें इसपर कोई स्टैंड खुलकर लेना चाहिए था। हर बात पर सिर्फ हेमंत सोरेन की हां में हां मिलाने पर लॉन्ग टर्म में पार्टी को नुकसान हो सकता है। वे कहते हैं कि जबतक सरकार चल रही है तबतक तो ठीक है, लेकिन जिस दिन कांग्रेस को झामुमो से अलग होकर चुनाव लड़ना पड़ा, उसदिन कई सवालों के जवाब देने मुस्किल हो जाएंगे ।

