न चल सकते थे, न बोल सकते थे, लेकिन कोविशील्ड का टीका लगाते ही हुआ चमत्कार

दुलारचंद पर कोविशील्ड के असर पर मेडिकल साइंस करेगा शोध
दुलारचंद पर कोविशील्ड के असर पर मेडिकल साइंस करेगा शोध

बोकारो के पेटरवार प्रखंड के उत्तासारा पंचायत के सलगाडीह के रहनेवाले दुलारचंद मुंडा चार साल से जिन्दा लाश ही थे। ना तोे चल सकते थे और ना ही बोल सकते थे। बिस्तर पर पड़ा रहना की उनकी नीयति बनी हुई थी। एक हादसे में चार साल पहले उनकी आवाज चली गयी थी और वे पैर का ताकत खोकर अपाहिज बन गए थे। पर उनके साथ चमत्कार ही हो गया। कोरोना का टीका कोविशील्ड का पहला डोज लेते ही उनके साथ जो हुआ, वह लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है। उनकी आवाज वापस आ गयी और बिस्तर पर पड़े रहनेवाले दुलारचंद मुंडा के पैर में भी हरकत हो गयी और वे खुद अपने पैरों पर खड़ा होकर चल पड़े।

स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी भी दुलारचंद मुंडा पर कोविशील्ड के असर को देखकर हैरत में है। अब स्वास्थ्य विभाग भी इस चमत्कार को शोध का विषय बताता है। बहरहाल उनके साथ हुए इस चमत्कार से उनके जीवन में नया उत्साह आ गया है और परिजन भी बेहद खुश हैं। कोवीशील्ड का टीका लेने के बाद अपने अंदर आए परिवर्तन से बेहद उत्साहित दुलारचंद मुंडा अब सबका आभार जता रहे है।

उधर जिले के सिविल सर्जन भी इस घटना से सुखद आश्चर्य में हैं।अब आप इसे चमत्कार कहें या फिर ईश्वर की देन। थोडी देर के बाद हैरान होकर एक-दूसरे से पूछने लगे कैसे हुआ ये सब। तुरंत जवाब यही आया- कोविशिल्ड का टीका। सटीक जानकारी और जवाब तो आने वाले दिनों में मिलेगा जब चिकित्सा जगत दुलारचंद मुंडा की बीमारी और उसकी रिकवरी पर शोध करेगा।

क्षेत्र में चर्चा यह है कि चार वर्षों से जिंदगी की जंग लड़ रहे मुंडा सिर्फ कोविशिल्ड वैक्सीन लेने के बाद न सिर्फ उनकी लड़खड़ाती आवाज बेहतर हो गई। बल्कि उसके शरीर में नई जान आ गई।

सलगाडीह गांव निवासी दुलारचंद मुंडा करीब पांच वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। इलाज होने के बाद वह ठीक तो हो गया ,लेकिन उसके शरीर का अंग काम करना बंद कर दिया था। इसके साथ उसकी आवाज भी लड़खड़ाने लगी थी। 1 साल से उसकी जिंदगी चारपाई में ही बीत रही थी। पेटरवार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ अलबेल केरकेट्टा ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका की ओर से चार जनवरी को उसके घर मे जाकर वैक्सीन दिया गया था और पांच जनवरी से ही उसके बेजान शरीर ने हरकत करना शुरू कर दिया था।

स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ अलबेल केरकेट्टा ने कहा कि उसे इस्पाइन का प्रॉब्लम था, जिसकी कई तरह का रिपोर्ट हमने देखा भी था। बहरहाल यह एक जांच का विषय है।

सिविल सर्जन डॉ जितेद्र कुमार ने इसे आश्चर्यजनक घटना माना है तथा मेडिकल टीम गठित कर उसका मेडिकल हिस्ट्री का विश्लेषण करने की बात कही है। गांव के शिक्षक राजू मुंडा मानते हैं कि उसकी वापसी किसी चमत्कार से कम नहीे। उनकी मानें तो चार लााख से ज्यादा रकम लगाकर उसने इलाज कराया मगर कोई फायदा नहीं हुआ और ब कोरोना के टीका ने चमत्कार ही कर दिया।

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