भूमि अधिग्रहण और वनाधिकार कानून पर अंबा प्रसाद के सवाल पर सीएम ने लिया संज्ञान

*विधायक अंबा प्रसाद के प्रश्न भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 एवं वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू करने के मामले पर माननीय मुख्यमंत्री ने सदन में लिया संज्ञान*    *देश के अन्य खनिज समृद्ध राज्यों द्वारा लिए गए निर्णय का अध्ययन कर यथाशीघ्र नीति निर्धारण कर नीतियों को लागू करने की दिशा में किया जाएगा कार्य-मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन*  बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 एवं वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू करने को लेकर विधानसभा सत्र के दौरान माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से प्रश्न किया| उन्होंने मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के दौरान मामले को उठाते हुए कहा कि खनन कंपनियों द्वारा झारखंड राज्य में अधिग्रहण में कानून और नियमों को ताक पर रख कर मनमानी की जा रही है। मुआवजा का निर्धारण खनन शुरू करने के कई वर्षों पहले कर लिया जाता है जबकि खनन देर से शुरू किया जाता है। इससे विस्थापितों की उनके जमीन की दर पुराने दर पर काफी कम मिलती है। साथ ही उनकी जमीन वर्षों तक फसी रहती है, वे उस जमीन का कोई उपयोग नहीं कर पाते हैं, उन्हें कंपनियां noc नहीं देती। विस्थापित और स्थानीय लोग अपनी आवाज उठाते हैं तो उनके ऊपर झूठे केस मुकदमें कर दिए जाते हैं, कंपनियों ने स्थानीय लोगों को दबाने के लिए गुर्गे भी पाल रखे हैं।  वही अंबा प्रसाद ने माननीय मुख्यमंत्री जी से विस्थापन आयोग के गठन को लेकर भी निवेदन किया| उन्होंने कहा कि सरकार के समक्ष विस्थापन आयोग के गठन की बात विचाराधीन है और हर दिन हर रात लोग बेघर हो रहे हैं लोगों को बगैर उचित मुआवजा उचित हक एवं अधिकार उपलब्ध कराए घरों से निकाला जा रहा है|   विधायक अंबा प्रसाद के प्रश्न वर्ष 2013 के उपरांत खनन शुरू करने वाली कंपनियों द्वारा मुआवजा भुगतान हेतु भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 तथा वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू कराने के मामले पर माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मामला कोयला खनन से संबंधित है और वर्तमान में CBA Act, LA Act 1894 के तहत भूमि अधिग्रहण किया जाता है| माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि एनटीपीसी द्वारा समय-समय पर राज्य सरकार को शिकायतें प्राप्त होती रही है| केंद्र की पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा लाई गई वर्ष 2013 में भूमि अधिग्रहण अधिनियम कानून लागू करने के मामले पर श्री हेमंत सोरेन जी ने विधायक अंबा प्रसाद को आश्वस्त करते हुए कहा कि देश के अन्य खनिज समृद्ध राज्यों में इस विषय में क्या क्या निर्णय लिए गए हैं उसका अध्ययन करते हुए राज्य सरकार नीति निर्धारण करने के विचार में है और बहुत जल्द उसका अध्ययन कर नीति का निर्धारण किया जाएगा और नीति को लागू किया जाएगा|

देश के अन्य खनिज समृद्ध राज्यों द्वारा लिए गए निर्णय का अध्ययन कर यथाशीघ्र नीति निर्धारण कर नीतियों को लागू करने की दिशा में किया जाएगा कार्य- हेमंत सोरेन

बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 एवं वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू करने को लेकर विधानसभा सत्र के दौरान माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से प्रश्न किया|

उन्होंने मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के दौरान मामले को उठाते हुए कहा कि खनन कंपनियों द्वारा झारखंड राज्य में अधिग्रहण में कानून और नियमों को ताक पर रख कर मनमानी की जा रही है। मुआवजा का निर्धारण खनन शुरू करने के कई वर्षों पहले कर लिया जाता है जबकि खनन देर से शुरू किया जाता है।

इससे विस्थापितों की उनके जमीन की दर पुराने दर पर काफी कम मिलती है। साथ ही उनकी जमीन वर्षों तक फसी रहती है, वे उस जमीन का कोई उपयोग नहीं कर पाते हैं, उन्हें कंपनियां noc नहीं देती। विस्थापित और स्थानीय लोग अपनी आवाज उठाते हैं तो उनके ऊपर झूठे केस मुकदमें कर दिए जाते हैं, कंपनियों ने स्थानीय लोगों को दबाने के लिए गुर्गे भी पाल रखे हैं।

वही अंबा प्रसाद ने माननीय मुख्यमंत्री से विस्थापन आयोग के गठन को लेकर भी निवेदन किया| उन्होंने कहा कि सरकार के समक्ष विस्थापन आयोग के गठन की बात विचाराधीन है और हर दिन हर रात लोग बेघर हो रहे हैं लोगों को बगैर उचित मुआवजा उचित हक एवं अधिकार उपलब्ध कराए घरों से निकाला जा रहा है|

विधायक अंबा प्रसाद के प्रश्न वर्ष 2013 के उपरांत खनन शुरू करने वाली कंपनियों द्वारा मुआवजा भुगतान हेतु भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 तथा वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू कराने के मामले पर माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मामला कोयला खनन से संबंधित है और वर्तमान में CBA Act, LA Act 1894 के तहत भूमि अधिग्रहण किया जाता है| माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि एनटीपीसी द्वारा समय-समय पर राज्य सरकार को शिकायतें प्राप्त होती रही है|

केंद्र की पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा लाई गई वर्ष 2013 में भूमि अधिग्रहण अधिनियम कानून लागू करने के मामले पर श्री हेमंत सोरेन जी ने विधायक अंबा प्रसाद को आश्वस्त करते हुए कहा कि देश के अन्य खनिज समृद्ध राज्यों में इस विषय में क्या क्या निर्णय लिए गए हैं उसका अध्ययन करते हुए राज्य सरकार नीति निर्धारण करने के विचार में है और बहुत जल्द उसका अध्ययन कर नीति का निर्धारण किया जाएगा और नीति को लागू किया जाएगा ।

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