हजारीबाग: बानादाग रेलवे कोल साइडिंग में ग्रामीणों से झड़प के बाद पुलिस पर पथराव

सदर एसडीपीओ समेत दर्जनभर घायल
सदर एसडीपीओ समेत दर्जनभर घायल

उज्जवल दुनिया संवाददाता/ अजय निराला

हजारीबाग। जिले के बानादाग रेलवे कोल साइडिंग में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कई दिनों से कोल साइडिंग में कोयला उठाने का काम बंद है। अपनी मांगों को लेकर ग्रामीण और रैयत धरने पर बैठे हुए हैं। उनका साथ सत्ताधारी दल के कई नेता भी दे रहे हैं। ग्रामीणों के सड़क पर धरने देने के कारण प्रशासन के लिए काफी चुनौती बनी हुई है। धरने के कारण वाहनों की लंबी कतार लग गई है। यातायात सामान्य करने के लिए प्रशासन को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि रविवार की सुबह बानादाग में धरने पर बैठे ग्रामीणों को जब हटाने के लिए पुलिस गई तो पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने वहां लाठियां चटकाई थीं। उसके बाद पुलिस पर पथराव होने लगा। इसमें सदर एसडीपीओ महेश प्रजापति, पेलावल इंस्पेक्टर प्रभात कुमार, लोहसिंगना थाना प्रभारी अरविंद कुमार सिंह समेत 10 पुलिसकर्मी और दो आंदोलनकारी घायल हो गए।

पुलिस लाठीचार्ज में दर्जनों ग्रामीण घायल
पुलिस लाठीचार्ज में दर्जनों ग्रामीण घायल

ग्रामीणों को हटाने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार की। बाद में अश्रुगैस के गोले भी छोड़े। पूरा बानादाग साइडिंग पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। यहां अतिरिक्त पुलिस बल को बुला लिया गया है। वहां बड़कागांव विधायक भी आंदोलनकारियों से बातचीत करने पहुंची हैं। इसी मामले में हजारीबाग सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह जेल भेजे जा चुके हैं। पिछले दिनों हजारीबाग सदर विधायक मनीष जायसवाल के समर्थकों से भी झड़प हुई थी, जिसमें हाथापाई और प्राथमिकी तक हुई थी।

ग्रामीणों के पथराव में घायल जवान
ग्रामीणों के पथराव में घायल जवान

दरअसल यहां एनटीपीसी और उसकी रिसोर्स कंपनी त्रिवेणी सैनिक से कोयला डंप किया जाता है। वहां से रेलवे रैक से देश के विभिन्न पावर प्लांटों में कोयला भेजा जाता है। इसमें ग्रामीणों का कहना है कि कोल डस्ट से उनकी फसलें मारी जा रही हैं। खेत बंजर हो चुके हैं और पर्यावरण भी प्रदूषित हो गया। लोगों का रहना दुर्लभ हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों के बारे में कोई नहीं सोच रहा। इसलिए वह खुद ही आंदोलन पर उतारू हैं।

इधर ग्रामीणों की समस्याओं को हथियार बना विभिन्न राजनीतिक दल के नेता अपनी राजनीति रोटी सेंकने में लगे हुए हैं। इसी कारण यहां विधि व्यवस्था बिगड़ने की बात कही जा रही है।

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