आयुष मिशन के लिए केंद्र सरकार ने दिए 15 करोड़, खर्च हुए सिर्फ 4.5 लाख रुपए

सांसद संजय सेठ के सवाल पर केंद्रीय आयुष मंत्री का जवाब
सांसद संजय सेठ के सवाल पर केंद्रीय आयुष मंत्री का जवाब

 

रांची/ नई दिल्ली।  बीते 2 वर्षों में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के द्वारा झारखंड को 15 करोड़ रुपए आयुष योजनाओं के संचालन के लिए दिए गए। इन पैसों का उपयोग राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी चीजों को बढ़ावा देने में किया जाना था परंतु राज्य सरकार सिर्फ 4.5 लाख रुपए ही खर्च कर पाई। उक्त आशय की जानकारी केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में सांसद श्री संजय सेठ को दी।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के मामले में उजागर हुई राज्य की उदासीनता

अतारांकित प्रश्न काल में सांसद श्री संजय सेठ ने केंद्रीय मंत्री से पूछा था कि झारखंड में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार क्या सहयोग कर रही है? किन योजनाओं का संचालन किया जा रहा है? सांसद ने यह भी पूछा था कि बीते 2 वर्षो में केंद्र सरकार ने राज्य को कितनी राशि दी है और उसका क्या उपयोग हुआ है?

इन सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने सांसद को सदन में लिखित रूप से बताया कि केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकार को राष्ट्रीय आयुष मिशन के संचालन के लिए दो साल में 15 करोड़ की राशि दी गई थी। इसमें आयुष कार्यक्रमों का प्रोत्साहन के साथ-साथ रांची में 50 बेड का आयुष अस्पताल, 100 आयुष स्वास्थ्य केंद्र व वेलनेस सेंटर खोले जाने की योजना पर काम होना था। इसके अतिरिक्त गोड्डा में स्थित होम्योपैथ मेडिकल कॉलेज का भी उन्नयन किया जाना था।

राज्य सरकार के द्वारा दिए गए रिपोर्ट के मुताबिक इतनी बड़ी राशि दिए जाने के बावजूद बीते 2 साल में राज्य सरकार सिर्फ 4.5 लाख की राशि ही खर्च कर पाई, शेष राशि यूं ही पड़ी रह गई।

इस जवाब के बाद सांसद संजय सेठ ने बयान देते हुए कहा कि एक तरफ राज्य सरकार के मंत्री केंद्र के असहयोग करने और पैसा नहीं देने का रोना रोते हैं। दूसरी तरफ राज्य सरकार केंद्र के द्वारा दिए गए सहयोग के एवज में भी काम नहीं कर पा रही है। 15 करोड़ रुपए की राशि मिलना और उसमें सिर्फ 4.5 लाख खर्च करना यह बताता है कि सरकार की मानसिकता काम करने की नहीं है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक तरफ केंद्र सरकार खुले हाथ से राज्य के विकास के लिए पैसे दे रही है और दूसरी तरफ राज्य सरकार उस पर काम नहीं कर पा रही है।

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