भगवत कृपा से भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रो. रवींद्र राय तो सुरक्षित बच गये, लेकिन झारखंड असुरक्षित दिख रहा

 

सरकार द्वारा संपोषित है ये भाषाई आंदोलन, भावनाओं को भड़काकर हिंसा फैलाने की साजिश
सरकार द्वारा संपोषित है ये भाषाई आंदोलन, भावनाओं को भड़काकर हिंसा फैलाने की साजिश

राजीव मिश्र
भाषाई उन्मादी हरवे-हथियारों से लैस और शराब के नशे में धुत तथाकथित उग्र आंदोलनकारियों के हमले में भगवान की कृपा से आज भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर (डॉ.) रवींद्र राय सुरक्षित बच गये। गौर करें तो, जिस तरह से भोजपुरी, मगही और अंगिका के नाम पर राज्य की झामुमो-कांग्रेस और राजद की हेमंत सोरेन सरकार के निर्णय ने भाषा विवाद पैदा किया है, उससे झारखंड झुलसते नजर आ रहा है। आज की घटना देखकर विश्वास हो गया कि भाषा विरोध के नाम पर राज्य में अराजकता फैलाने की तैयारी शुरू हो गई है।

कहां से हो रही है फिंडिंग ?

सीएए विरोध और किसान आंदोलन की तर्ज पर राज्य को अस्थिर करने का पूरा खाका तैयार हो चुका है। आंदोलनस्थल पर डीजे बज रहे हैं। लोग बड़ी-बड़ी गाड़ियों और ऑटो से पहुंच रहे हैं। जिस ऑर्गनाइज्ड तरीके से आंदोलन के नाम पर जहर बोने के काम शुरू हुआ है, उससे लगता है कि उन्हें बजाप्ते फंडिंग की जा रही है और इन तथाकथित आंदोलनकारियों के पीछे बड़ी-बड़ी पार्टियां खड़ी हैं। अंदरखाने की मानें तो यह सरकार संपोषित है। कांग्रेस समर्थित झामुमो के हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में राज्य की स्थिति की यह तो बानगी है, लेकिन अखबार उठा कर देख लीजिए तो पिछले पांच साल और इस दो साल के कार्यकाल का अंतर महसूस हो जायेगा। अखबार के पहले पन्ने और टेलीविजन के प्राइम टाइम रोज हो रहे बलात्कार, क्राइम, नक्सलवाद, लूट, डकैती और हत्या की खबरों से अटे पड़े हैं।

पूरे झारखण्ड में हिंसा फैलाने की साजिश

30 जनवरी को सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलने वाले स्वतंत्रता सेनानी मोहनदास करमचंद गांधी की पुण्यतिथि है और हमारे राज्य झारखंड में बापू की विचारधारा के तथाकथित अनुयायियों ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता #डाॅक्टर रवींद्र कुमार राय पर हमला कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। हालांकि प्रो. राय पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त कर दी गई। अगर वो मौके से बचकर नहीं निकलते तो कुछ भी हो सकता था। तथाकथित आंदोलनकारियों की मंशा कुछ और ही दिख रही थी। उनकी गाड़ी को आग लगा दी जाती। उनके बॉडीगार्ड की हत्या हो सकती थी। इसके बाद रवींद्र राय ने चास मुफस्सिल थाने पहुंचकर हमले की लिखित शिकायत की।

मूलवासी हक के लिए आवाज उठाते रहे हैं रविन्द्र राय, फिर उनपर हमला क्यों ?

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व सांसद और मंत्री रह चुके डॉ. राय ने बताया कि भाजपा किसान मोर्चा कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने राजगंज (धनबाद) जा रहे थे। धनबाद, बोकारो में क्षेत्रीय भाषा की सूची में भोजपुरी और मगही को शामिल किए जाने के खिलाफ रविवार को झारखंडी भाषा संघर्ष समिति ने मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाने का कार्यक्रम आयोजित किया था।

पूर्व सांसद रविन्द्र राय की क्षतिग्रस्त गाड़ी
पूर्व सांसद रविन्द्र राय की क्षतिग्रस्त गाड़ी

इसी दौरान भाषाई आंदोलनकारियों की मानव श्रृंखला देख महुदा मोड़ और चास के बीच पुपुनकी में तेलमच्चो (दामोदर नद) पुल के पास स्थित पेट्रोल पंप के बगल में गाड़ी रोक दी। तभी भोजपुरी, अंगिका-मगही विरोधी भाषाई आंदोलनारी पहुंचे और उनसे समर्थन मांगने लगे। प्रो. राय ने उन्हें समझाने की कोशिश की। कहा, स्थानीय मुद्दों पर हम जनता के साथ रहते हैं, लेकिन भाषा के विवाद का हम विरोध करते हैं। इसी बीच नशे में चूर अनियंत्रित लोगों ने लाठी-डंडे, पत्थर, कुल्हाड़ी से हमला कर दिया गया। गाड़ी में तोड़फोड़ शुरू हो गई। शीशे और गाड़ी में लगे नेम प्लेट तोड़ दिये गये। पार्टी का झंडा नोच दिया गया। हमले से बचाने के दौरान उनके अंगरक्षक को चोट आई है।

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