मंत्री मिथलेश ठाकुर पर लगे आरोप कितने गंभीर? क्या सचमुच जा सकती है विधायकी ?

 

मिथिलेश ठाकुर हेमंत कैबिनेट के चौथे ऐसे मंत्री हैं जिनपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं
मिथिलेश ठाकुर हेमंत कैबिनेट के चौथे ऐसे मंत्री हैं जिनपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं

रांची। सुनील महतो ने केंद्रीय चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी में कहा है कि विधानसभा चुनाव – 2019 में गढ़वा से निर्वाचित मिथिलेश कुमार ठाकुर का निर्वाचन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 9A के दायरे में है । उनकी सदस्यता समाप्त करने योग्य है ।

1992 में सेवाराम बनाम सोबरन मामले में सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है की कोई भी जनप्रतिनिधि सरकारी ठेका नहीं ले सकता ।

मिथिलेश कुमार ठाकुर द्वारा अपने फॉर्म 26 में दिए गए ब्यौरे के अनुसार, वह मेसर्स सत्यम बिल्डर्स, अमला टोला, चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम के पार्टनर हैं । यह कंपनी सरकारी ठेका लेने का काम करती है ।

केस- 01

सरायकेला-खरसावां मार्ग पर बनी संजय नदी पर 8.18 करोड़ की लागत से उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए मिथिलेश ठाकुर की कंपनी ने सरायकेला-खरसावां पथ निर्माण विभाग से 21 मई 2013 को एग्रीमेंट किया था । एग्रीमेंट के अनुसार, कार्य समाप्ति की तिथि 20 अक्टूबर 2014 थी । उक्त पुल निर्माण का कार्य जनवरी 2022 तक लंबित है । यानी मिथिलेश कुमार ठाकुर द्वारा पथ निर्माण विभाग के साथ की गई संविदा विधानसभा चुनाव 2019 के बाद भी जनवरी 2022 तक अस्तित्व में है ।

केस- 02
बिहार सरकार की कंपनी बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड के साथ तिरहुत पूर्वी प्रमण्डल के क्षेत्राधीन कई मॉडल स्कूल के भवनों का निर्माण कार्य के लिए मेसर्स सत्यम बिल्डर्स द्वारा 2014 में एग्रीमेंट किया गया । यह एग्रीमेंट विधानसभा चुनाव 2019 के समय अस्तित्व में थी । एग्रीमेंट के अनुसार, काम पूरा नहीं होने पर बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड ने 16 अगस्त 2021 को यह एग्रीमेंट रद्द कर दिया है ।

केस- 03
9.36 करोड़ की लागत से चक्रधरपुर नगर परिषद भवन कार्यालय का निर्माण, कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के ऑडिटोरियम का निर्माण कार्य विधान सभा चुनाव 2019 के दौरान लंबित था. यह संविदा भी लंबित थी.

केस- 04
जगन्नाथपुर में आईटीआई कॉलेज के भवन निर्माण में मजदूरों को निर्धारित मजदूरी दर नहीं देने पर 25 मजदूरों ने 6 अगस्त 2013 को मेसर्स सत्यम बिल्डर्स के खिलाफ श्रम विभाग से शिकायत की थी । इसी तरह झींकपानी में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण में 44 मजदूरों ने कम मजदूरी देने की शिकायत की थी.

श्रम विभाग ने दोनों मामलों में कुल 01 लाख 06 हजार 815 रुपये का जुर्माना लगाया था । जिसे मिथिलेश ठाकुर की कंपनी ने अभी तक नहीं चुकाया है ।

आरोप है कि ऐसे में मिथिलेश ठाकुर दो दो लाभ के पद पर बने हुए हैं जबकि नियम अनुसार उन्हें कंपनी के पार्टनरशिप से खुद को अलग कर लेना था लेकिन मिथिलेश ठाकुर ने ऐसा नहीं किया आरोप ये भी है कि इस दौरान इस कंपनी ने झारखंड में भी और कई ठेके लिए हैं।

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